उत्तर प्रदेश अयोध्या: भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व सांसद विनय कटियार नए विधानसभा चुनाव में अयोध्या सीट से लड़ने का ऐलान कर पार्टी में हलचल मचा रखी है। जिले में ही नहीं लखनऊ से लेकर दिल्ली तक कटियार के कदमों पर नजर है। अयोध्या सीट से चुनाव लड़ने का उनका बयान ऐसे समय आया जब वह भाजपा के प्रदेश के नये नवेले अध्यक्ष पंकज चौधरी से लखनऊ में शिष्टाचार मुलाकात करके अयोध्या लौट कर आए थे। प्रदेश अध्यक्ष सोमवार को अयोध्या आ रहे हैं। पार्टी नेताओं ने अवध विश्वविद्यालय के सभागार में उनका कार्यक्रम रखा है। स्वागत की जोरदार तैयारी है। शहर के प्रमुख मार्ग छोटे-बड़े होर्डिंग से पट गए हैं। कटियार भी स्वागत करने के लिए सोहावल के कांटा चौराहे पर शामिल होंगे। प्रदेश अध्यक्ष के अयोध्या आने से पहले चुनाव लड़ने का जो अयोध्या विधानसभा सीट से संदेश दिया है वह शूल की तरह चुभने वाला है। यह सही है कि कटियार अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान कर पार्टी नेतृत्व को मुश्किल में डाल चुके हैं, वह भी तब जब विधानसभा चुनाव को अभी एक वर्ष बाकी हो। यह भी सही है कि अगर वह चुनाव मैदान में होंगे तो काफी हद तक सजातीय मतों को पार्टी के पक्ष में रोकने में सफल होंगे। अगर पार्टी ने उनको उम्मीदवार नहीं बनाया तो बिदके सजातीय वोटो को भाजपा के लिए रोक पाना आसान नहीं होगा। 2024 के लोकसभा चुनाव में जिस कुर्मी बिरादरी ने पीडीए के नाम पर साइकिल पर सवारी करने में देर नहीं लगाई थी, वह कटियार का कहना मानेगी, जब गुजरात गुलाबी उन्हें हास्य पर ढकेल चुकी हो। चुनाव लड़ने के समय कटियार के प्रति सजातीय मतों की सहानुभूति स्वाभाविक है। उनके जाने के बाद से बिरादरी में कोई इतना बड़ा नेता नहीं हुआ जिसके कद का आकलन उनसे किया जा सके। एक सयाने राजनेता के नाते भाजपा की इस कमजोरी को वह जान चुके हैं। संभवत इसीलिए चुनाव लड़ने की गेंद भाजपा नेतृत्व के समक्ष डाल चुके हैं। जिस पर चुनावी नफा नुकसान देखते हुए उसे निर्णय करना है।
कमोबेश समाजवादी पार्टी के सामने भी जिले में एक भी बड़ा कुर्मी नेता नहीं है जिसका प्रभाव आसपास के जिलों में हो। जो हैं भी वे विधानसभा क्षेत्र तक ही हैं। कुर्मी महाकुंभ का आयोजन भी उसी का नतीजा रहा। अंबेडकर नगर के सांसद लालजी वर्मा को समाजवादी पार्टी जिले में लाकर उपयोग करती है। लेकिन वह सजातीय वोटो को अपने लिए तो जुटा सकते हैं। दूसरे के पक्ष में ट्रांसफर करा सकने की क्षमता नहीं है जो दिवंगत बेनी प्रसाद वर्मा की रही। बेनी वर्मा की पहचान प्रदेश की कुर्मी बिरादरी में बड़े नेता के रूप में रही। समाजवादी पार्टी उनकी कमी को दूर नहीं कर सकी। वह भी कुर्मी बिरादरी के जिले के क्षत्रपों के सहारे है।
वॉइस ब्यूरो चीफ रामानंद सागर


