महिला भूमिहार समाज द्वारा खिचड़ी एवं विशाल कंबल वितरण

माघे कृतं तु दानं च बहुकल्पफलं स्मृतम्।
अन्नदानं विशेषेण देवान् तुष्यति माधवः॥ अर्थात— माघ मास में किया गया दान अनेक कल्पों तक फल देने वाला माना गया है। विशेष रूप से अन्नदान से भगवान माधव (विष्णु) अत्यंत प्रसन्न होते हैं। इसी पावन भावना के साथ आज महिला भूमिहार समाज द्वारा अस्सी घाट स्थित ‘काशी अन्न क्षेत्र’ में पुण्य माघ मास के अवसर पर दरिद्र नारायण सेवा के अंतर्गत जरूरतमंदों को खिचड़ी खिलाकर एवं कंबल का वितरण किया गया। भारतीय संस्कृति में माघ महीने में खिचड़ी खिलाने की परंपरा धार्मिक एवं सांस्कृतिक—दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह सेवा भाव न केवल आध्यात्मिक शुद्धता का प्रतीक है, बल्कि समाज में करुणा, सहयोग और सकारात्मक सोच को भी सुदृढ़ करता है।
इस अवसर पर महिला भूमिहार समाज की संस्थापिका डॉ. राजलक्ष्मी राय ने कहा कि सर्दी के मौसम में जरूरतमंद, असहाय एवं बेघर लोगों को भोजन एवं वस्त्र प्रदान करना हमारा सामाजिक और आध्यात्मिक दायित्व है। जब यह सेवा सामूहिक रूप से की जाती है, तो उसका पुण्य और प्रभाव दोनों कई गुना बढ़ जाते हैं। इस सेवा कार्यक्रम में
डॉ. राजलक्ष्मी राय, पूनम सिंह, डॉ. मंजुला चौधरी, प्रतिमा सिंह, सोनी राय, विजयता राय, बंदना सिंह, चंद्रकला राय, सरिता, बबीता, सुमन सिंह, प्राची राय पूनम सिंह,अमिता राय,ऋतु,रंजना,अंबू,संध्या,उमा सहित अन्य सदस्यों ने सक्रिय रूप से सहयोग प्रदान किया। महिला भूमिहार समाज द्वारा किया गया यह सेवा कार्य समाज के प्रति समर्पण, संवेदनशीलता और सांस्कृतिक मूल्यों का सशक्त उदाहरण है।

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