छपिया (गोंडा)कस्बे के शनी मैरेज लॉन में चल रही छह दिवसीय ‘जय श्री वल्लभ राष्ट्र कथा’ के चौथे दिन गुरुवार को राष्ट्र निर्माण के ऐतिहासिक अध्यायों पर गंभीर मंथन हुआ। इस अवसर पर लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों, आपसी संवाद तथा संविधान निर्माण में उनकी भूमिका का सजीव और तथ्यपरक वर्णन प्रस्तुत किया गया। कथा सुनकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर और गंभीर नजर आए।
राष्ट्र कथाकार महामान्यवर हरीभाई पटेल वल्लभानंद जी महाराज ने कहा कि स्वतंत्र भारत का संविधान केवल कानून का ग्रंथ नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा है। उन्होंने कहा कि “सरदार पटेल की अनुशासनप्रियता और डॉ. आंबेडकर की सामाजिक न्याय की सोच ने मिलकर एक सशक्त, समरस और लोकतांत्रिक भारत की नींव रखी।कथावाचक ने कहा कि मतभेदों के बावजूद दोनों महान विभूतियों ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। उन्होंने बताया कि संविधान निर्माण के दौरान सरदार पटेल ने प्रशासनिक स्थिरता और राष्ट्रीय एकता पर बल दिया, जबकि डॉ. आंबेडकर ने समानता, अधिकार और सामाजिक न्याय को मजबूती दी।
उन्होंने युवाओं से संविधान के मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण तभी संभव है, जब नागरिक अपने कर्तव्यों और अधिकारों दोनों को समझें।
कार्यक्रम में पटेल समाज सहित विभिन्न समाजों के लोगों की बड़ी संख्या में सहभागिता रही। आयोजन समिति के अनुसार राष्ट्र कथा 7 फरवरी तक प्रतिदिन जारी रहेगी, जबकि समापन दिवस पर विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। एमडी न्यूज ब्यूरों गोंडा अजीत यादव

