रिपोर्ट- ओम प्रकाश साहू। त्रिवेदीगंज,बाराबंकी।बाराबंकी- खबर है बाराबंकी जनपद के त्रिवेदीगंज ब्लॉक के मकनपुर ग्राम में जहां पर अधिकारियों के लामबंदी जारी है बता दे कि बीते कुछ महीनो पहले खराब हुई स्ट्रीट लाइटो को लेकर स्थानीय प्रशासन से लोगों द्वारा शिकायत किया गया था। लेकिन प्रशासन द्वारा संतोष जनक काम न करवाने को लेकर एक बार फिर से ग्रामीणों के आगे समस्या खड़ी हो गयी है। क्योंकि यहां के लोग प्रशासन के नर्मी से परेशान हैं। दरअसल, गांव में कुछ स्ट्रीट लाइट काफी महिनो से खराब पड़ी थी, जिसको लेकर ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। इसको लेकर ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री पोर्टल से लेकर स्थानीय प्रशासन तक शिकायत की, लेकिन काफी प्रयासों के बाद प्रशासन ने इसकी शुद्ध तो ली लेकिन इन स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत सही ढंग से न होने से उनकी हालत फिर से खराब हो गई है और यह जलना बंद हो गई है। जिससे रात के समय गलियों में अंधेरा छा जाता है। राहगीरों को आने-जाने में असुविधा हो रही है। मिली जानकारी के अनुसार ग्रामीणों ने बताया कि गांव में तकरीबन हर स्ट्रीट लाइट खराब पड़ी हुई है इसको लेकर हमने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की लेकिन अधिकारी अपनी झूठी रिपोर्ट लगाकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं, और हमारी समस्याओं का समाधान नहीं हो पता है। जिससे हमें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने आगे बताया की कुछ दिन पहले मीडिया द्वारा दिखाई गई खबर का असर तो हुआ।जिसके बाद प्रशासन के कर्मचारी मौके पर आए और स्ट्रीट लाइटों को उतरवा कर मरम्मत के लिए भेज दिया लेकिन ये सही तरीके से न बनने के कारण कुछ ही दिनों में जलन बंद हो गई।जिससे हमें फिर से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं लाइटों से गांव में उजला होता था।लेकिन अब लाइट ना जलने के कारण पूरे गांव में अंधेरा छाया हुआ है।ग्रामीणो ने ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव पर गंभीर आरोप लगाएं!बताएं कि जब मामले ने तूल पकड़ा तो ग्राम प्रधान और सचिव प्रफुल्ल वर्मा ने आनन-फानन में कुछ मकैनिकल लोगों को बुलाकर इन लाइटों को मरम्मत के लिए भेज दिया गया। लाइटों की सही ढंग से मरम्मत न होने के कारण ये फिर से जलना बंद हो गई। बता दें की मामले को दबाने के लिए केवल दिखावा किया गया। जिससे ग्रामीणों की समस्या जस की तस बनी हुई है। ऐसे में ग्रामीणो के साथ किया जा रहा मजाक कहीं न कहीं प्रशासन के दोहरे चरित्र को दिखाता है। जिम्मेदारो का यह रवैया क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणो को अब भी अपनी समस्या के निस्तारण के लिए इंतजार हैं। उन्होंने मामले में डीएम को हस्तक्षेप करने की गुजारिश कि है क्योंकि छोटे स्तर पर उन्हें सिर्फ दिलाशा मिलती है काम नहीं होता। इससे लोगों का जिम्मेदारो पर विश्वास कम हो जाता है और कहीं न कहीं वह अपनी समस्याओं को ऊपर स्थर पर उठाने में असमर्थ होते हैं।

