जनपद मथुरा का कस्बा बाजना विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बाजना कस्बा आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। नगर पंचायत का दर्जा मिले चार दशक बीत गए, लेकिन जनसुविधाओं के नाम पर स्थिति आज भी ‘ढाक के तीन पात’ वाली है।कस्बे की मुख्य सड़कें सरकारी कागजों में तो 80 फुट चौड़ी हैं, लेकिन मौके पर महज 20 फुट रह गई हैं। लालपुर चौक, महादेव गंज और बड़ा बाजार जैसे इलाकों में पक्के अतिक्रमण ने सड़कों को संकरी गलियों में तब्दील कर दिया है। अवैध टेम्पो स्टैंड और बेतरतीब दुकानों के कारण घंटों जाम लगा रहता है, जिससे एम्बुलेंस जैसे आपातकालीन वाहन भी फंस जाते हैं। विरोध करने पर राहगीरों को बदसलूकी का सामना करना पड़ता है। फरीदाबाद-पलवल के लिए सीधी बस का अभावयमुना एक्सप्रेस-वे से सटा होने के बावजूद बाजना में एक व्यवस्थित बस स्टैंड तक नहीं है। 50 से अधिक गांवों के यात्री सड़क किनारे असुरक्षित खड़े होकर बसों का इंतजार करते हैं। सबसे बुरा हाल उन छात्रों और कामगारों का है जिन्हें प्रतिदिन फरीदाबाद या पलवल जाना पड़ता है। सीधी रोडवेज सेवा न होने से उन्हें डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है।स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि कस्बे को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए और फरीदाबाद-पलवल के लिए तत्काल सीधी बस सेवा शुरू की जाए ताकि हजारों लोगों को राहत मिल सके।


