बोल कि लब आजाद हैं तेरे, बहुआयामी विचारधारा जन जन तक,पुनीत शुक्ला की कलम से 🖋️
वर्तमान समाज की स्थिति और परिस्थितियों को समझते हुए शिक्षा तकनीकी एवं अनुसंधान में अहम बहुआयामी सोच के साथ बदलाव करने की आवश्यकता है। जो की बहुआयामवाद बहुआयामी राजनीतिक पार्टी…
