Month: March 2024

भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी ने होली के मोके पर एक दूसरे पर गुलाल लगाया

रिपोर्ट:आसिफ रईसबिजनौर -भारतीय किसान यूनियन अराजनीतिक के युवा प्रदेश अध्यक्ष चौधरी दिगंबर सिंह के साथ उनके गांव चमरोला में केशव त्यागी सहित देवेंद्र सिंह अहलाव त्रिवेंद्र सिंह लंबरदार संजीव कुमार…

लोकसभा चुनाव के पोलिंग बूथों का डीएम व एसपी ने किया निरक्षण।

रिपोर्टर:- मोहम्मद फ़ैज़ान बिजनौर । डीएम अंकित अग्रवाल तथा एसपी नीरज जादौन ने शनिवार दोपहर नगर क्षेत्र के मतदान केंद्रों और पोलिंग बूथों का निरीक्षण किया।एसडीएम अवनीश त्यागी तथा नगर…

होली पर्व पे ज़रूरत मंदो को वस्त्र वितरण हुआ ॥

रोहित सेठ होली पर्व पे ज़रूरत मंदो को वस्त्र वितरण हुआ ॥ हर प्रमुख त्योहारो पे वस्त्र मिलेगा महंत शंकर पूरी ॥ रोहित सेठ अन्नपूर्णा मंदिर ने नेक कार्य शुरू…

सदस्य कर्षण एवं रोलिंग स्टॉक, रेलवे बोर्ड सतीश कुमार का बरेका निरीक्षण

रिपोर्ट राजेश गुप्तादिनांक 23 मार्च 2024 को सदस्य कर्षण एवं रोलिंग स्टॉक, रेलवे बोर्ड श्री सतीश कुमार ने बनारस रेल इंजन कारखाना का निरीक्षण किया। इस दौरान प्रमुख कार्यकारी निदेशक,…

विश्व जल दिवस-शांति के लिए जल’ पर आयोजित हुआ संगोष्ठी कार्यक्रम

रिपोर्ट:नागेंद्र प्रजापति प्रयागराज जिला गंगा समिति प्रयागराज के अतंर्गत वन विभाग द्वारा आज विश्व जल दिवस – ‘शांति के लिए जल’ थीम पर संगोष्ठी कार्यक्रम का अयोजन किया गया l…

मानव सहित समस्त जीव-जंतुओं के अस्तित्व के लिए जल संरक्षण एक महत्वपूर्ण योगदान है-एडवोकेट श्रीमती मीनू लालवानी

रिपोर्ट राहुल राव✍️✍️✍️नीमच /मध्यप्रदेश।-मानव इतिहास की प्रगति के लिएजल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है वर्तमान में मानवीय गतिविधियों के कारण संपूर्ण भारत में कई जगह जल संकट गहराता जा रहा…

मोमिन फ्रेंड्स सर्किल ने रोजदारों को कराई दावते-ए-इफ्तार।

रिपोर्ट- मोहम्मद फ़ैज़ान स्योहारा। रमज़ान मुबारक के मौके पर मोमिन फ्रेंड्स सर्किल ने दिनांक 22 मार्च 2024 बरोज जुमा मदरसा अनवारुल उलूम मंसूर सराय मे रोजगारों के लिए दावतए-ए-इफ्तार को…

व्यापार मंडल के अध्यक्ष आसिफ रईस ने जीशान अहमद को व्यापार मंडल का नगर सचिव नियुक्त किया।

रिपोर्टर- मोहम्मद फैज़ान स्योहरा । पश्चिम उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष आसिफ रईस ने व्यापार मंडल के नगर मंत्री कुर्बान अली की सहमति से जीशान अहमद को व्यापार…

रंगोत्सव में डॉ. सोमा घोष की गायकी ने बिखेरे सुरों के रंग॥

रोहित सेठ वाराणसी आज़ भारतीय संस्कृति में प्राय हर पर्व व उत्सव मनाने के पीछे धार्मिक और पौराणिक महत्व होता है। भौगोलिक विविधता के कारण इनके मनाये जाने के तरीके…

जिला जज व डीएम-एसपी ने किया जिला कारागार का औचक निरीक्षण

रिपोर्ट: रजनी कान्त मिश्रालखीमपुर खीरी 22 मार्च। कारागार प्रशासन द्वारा बन्दियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, कारागार की साफ-सफाई तथा अन्य व्यवस्थाओं का जायज़ा लेने के लिए शुक्रवार को…

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!