रिपोर्ट राजेश गुप्ता
दिनांक 23 मार्च 2024 को सदस्य कर्षण एवं रोलिंग स्टॉक, रेलवे बोर्ड श्री सतीश कुमार ने बनारस रेल इंजन कारखाना का निरीक्षण किया। इस दौरान प्रमुख कार्यकारी निदेशक, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, रोलिंग स्टॉक श्री मोहित चन्द्रा भी उपस्थित रहें। सर्वप्रथम बरेका आगमन पर महाप्रबंधक श्री बासुदेव पांडा ने पुष्प गुच्छ भेंट कर श्री सतीश कुमार का अभिनंदन किया, तत्पुश्चात् सदस्य कर्षण एवं रोलिंग स्टॉक ने बरेका के लोको फ्रेम शॉप, लोको असेम्बली शॉप, लोको टेस्ट शॉप, निर्माणाधीन न्यू लोको प्रोजेक्ट साइट एवं न्यूक ब्लॉक शॉप का गहन निरीक्षण किया। कर्मशाला में सदस्य कर्षण एवं रोलिंग स्टॉक, रेलवे बोर्ड, श्री सतीश कुमार ने विद्युत रेल इंजन की उत्पादन गतिविधियों, निर्माण सुविधाओं, बरेका में चल रही परियोजनाओं के साथ ही उत्पादन प्रक्रिया, अन्य तकनीकी विषयों एवं निर्माणाधीन न्यू, लोको प्रोजेक्ट् साइट के बारे में विस्तावरपुर्वक जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण के दौरान बरेका के महाप्रबंधक श्री बासुदेव पांडा सहित समस्त विभागाध्यक्षगण एवं अधिकारीगण उपस्थित रहें।

कर्मशाला भ्रमण के उपरांत बरेका कीर्ति कक्ष में सदस्य कर्षण एवं रोलिंग स्टॉक, रेलवे बोर्ड श्री सतीश कुमार ने बरेका महाप्रबंधक श्री बासुदेव पांडा एवं समस्त प्रमुख विभागाध्यक्षगण एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रगति समीक्षा बैठक की जिसमे रेल इंजन निर्माण से संबंधित महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की गई। प्रमुख मुख्य विद्युत इंजीनियर श्री एस.के.श्रीवास्तव ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से बरेका के स्थापना काल से लेकर अब तक की उपलब्धियों के विषय में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उक्त बैठक में उत्पादन गतिविधियों के साथ ही बरेका के अन्य कार्यों एवं विभिन्न चल रही परियोजनाओं के साथ भविष्य की योजनाओं पर विस्तृ‍त चर्चा की गयी । श्री कुमार ने बरेका द्वारा अपने लोको उत्पारदन के उच्चतम लक्ष्य की ओर अग्रसर होने पर प्रसन्न्ता व्यक्त की। साथ ही उन्होंने कहा कि बरेका अपने दूरदर्शी सोच के कारण ही उच्च लक्ष्य् एवं गुणवत्ता युक्त लोको उत्पादन करने में सफल रहा है। सदस्य, रेलवे बोर्ड, श्री सतीश कुमार ने और अधिक गुणवत्ता युक्त लोको उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरण अनुकुलन हेतु “रेन वाटर हार्वेस्टिंग” के लिए पूर्ण योजना बनाने, शोक-पीट की संख्या बढ़ाने, सभी पीट को ड्रेनेज से कनेक्ट करने, “क्वालिटी मैनेजमेंट” एवं “इनर्जी कन्जम्पशन” हेतु एक्शन प्लान तैयार करने के लिए निर्देशित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि लोको शेड से आने वाली समस्या के लिए लगातार शेड जाकर नियमित निगरानी करें। बरेका अपने अंतिम लोको ट्रायल के समय ही सूक्ष्मता के साथ विधिवत जांच कर लें, ताकि लोको फेल होने की संभावना न के बराबर रहे। सुधार की संभावना सदैव बनी रहती है, इसलिए छोटी-छोटी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। मार्केटिंग विभाग को निर्देशित करते हुए कहा कि ग्राहकों से लगातार फिडबेक लेते रहें, उनकी तकनीकी समस्याओं का शीघ्र समाधान करते रहें। भंडार विभाग लोको सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु लगातार प्रयासरत रहे।

मध्याह्न के पश्चात डीजल एवं विद्युत लोकोमोटीव में उत्पादन गतिविधियों से संबंधित मैराथन बैठक चली। धरातल पर लोको उत्पादन में आ रही समस्याओं का एक-एक कर जानकारी प्राप्त करते हुए निराकरण से संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिया। उत्पादन से संबंधित चरणबद्ध तरीके से वर्ष-वार किए गए कार्यों के साथ ही विभागीय बैठकों के दौरान लिए गए निर्णयों की समीक्षा की। रेल इंजन में लगने वाले कल-पुर्जे या कोई उपकरण अगर खराब आते है तो उन पर क्या कारवाई एवं रिप्लेसमेंट के साथ सुधार की जाती को विस्तारपूर्वक जाना। इम्प्लिमेन्टेशन ऑफ टोटल क्वालिटी मैनेजमेन्ट (टी.क्यू.एम.) के बारे में उल्लेख करते हुए उन्होनें अपने कार्यों को सीस्टमैटिक तरीके से करने के निर्देश के साथ ही डिजाइन में खासा ध्यान रखने पर जोर दिया। अंत में उन्होंने यह कहा की बरेका बहुत ही चरणबद्ध तरीके से उत्कृष्टता से अपने रेल इंजन का उत्पादक गुणवत्ता के साथ कर रहा है बस थोड़े रिफाइन्मेन्ट के साथ सबसे परफेक्ट होने की आवश्यकता है।

अंत में महाप्रबंधक श्री बासुदेव पांडा ने अपने संबोधन में मुख्य अतिथि महोदय का स्वागत करते हुए आश्ववस्त किया कि भविष्य में भी बनारस रेल इंजन कारखाना रेलवे बोर्ड द्वारा दिये गये लक्ष्य को उच्च गुणवत्ता के साथ प्राप्त करेगा और सुनिश्चित किया कि बरेका नित नई बुलंदियों की ओर अग्रसर रहेगा। बैठक का संचालन मुख्य अभिकल्प इंजीनियर, विद्युत लोको श्री अनिल कुमार जैन ने किया।

  *राजेश कुमार*
जन सम्‍पर्क अधिकारी

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!