नवोदय अस्पताल में शॉर्ट सर्किट से लगी आग, डॉ. प्रतीक गंगवार बने मरीजों के लिए ‘मसीहा’
रिपोर्ट Md न्यूज़ से जितेंद्र कुमार गौतम
चौथी मंजिल पर आग लगते ही मची भगदड़, मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालकर राधिका सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में कराया शिफ्ट; डॉक्टर और स्टाफ की तत्परता से टली बड़ी अनहोनी
बरेली। थाना इज्जतनगर क्षेत्र में मिनी बाईपास रोड स्थित कर्मचारी नगर रोड पर शनिवार को नवोदय अस्पताल की चौथी मंजिल पर एसी में शॉर्ट सर्किट के चलते अचानक आग लग गई। देखते ही देखते अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। आग की सूचना मिलते ही अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों में दहशत फैल गई। अस्पताल प्रबंधन ने तत्काल मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने की कवायद शुरू कर दी। इस दौरान कई मरीजों को बेहद सावधानी के साथ अस्पताल से बाहर निकाला गया।
घटना के बीच राधिका सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉ. प्रतीक गंगवार ने मानवीय संवेदनशीलता और चिकित्सकीय जिम्मेदारी की मिसाल पेश की। जैसे ही उन्हें नवोदय अस्पताल में आग लगने और मरीजों के सामने पैदा हुई आपात स्थिति की जानकारी मिली, उन्होंने बिना समय गंवाए मरीजों की मदद के लिए कदम आगे बढ़ाया। गंभीर मरीजों समेत अन्य मरीजों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के साथ उनके अस्पताल में उपचार की व्यवस्था कराने की जिम्मेदारी संभाली।
आग लगते ही अस्पताल में मची भगदड़
बताया गया कि नवोदय अस्पताल की चौथी मंजिल पर एसी में शॉर्ट सर्किट होने के बाद आग की लपटें और धुआं उठने लगा। आग की जानकारी फैलते ही अस्पताल में मौजूद मरीजों और तीमारदारों में हड़कंप मच गया। कई लोग अपने मरीजों को लेकर सुरक्षित स्थान की ओर भागते नजर आए।
अस्पताल प्रबंधन और स्टाफ ने स्थिति को संभालते हुए तत्काल मरीजों को बाहर निकालना शुरू किया। गंभीर मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया। इस दौरान अस्पताल परिसर के बाहर भी लोगों की भीड़ जुट गई और आसपास के मार्ग पर यातायात का दबाव बढ़ने से जाम जैसी स्थिति बन गई।
डॉ. प्रतीक गंगवार ने संभाली जिम्मेदारी
आपात स्थिति में डॉ. प्रतीक गंगवार ने मरीजों की सुरक्षा और इलाज को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने अपने अस्पताल की टीम को तत्काल तैयार रहने के निर्देश दिए और नवोदय अस्पताल से शिफ्ट किए जा रहे मरीजों के उपचार की व्यवस्था कराई।
आग की वजह से किसी मरीज का इलाज बाधित न हो, इसके लिए मरीजों को सुरक्षित तरीके से राधिका सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में शिफ्ट कराया गया। मरीजों की स्थिति के अनुसार बेड, दवाइयां, मेडिकल सुविधाएं और चिकित्सकीय निगरानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई।
गंभीर मरीजों को विशेष सावधानी से कराया गया शिफ्ट
आग जैसी आपात स्थिति में सबसे बड़ी चुनौती गंभीर और ऐसे मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालना होती है, जिन्हें खुद चलने-फिरने में परेशानी होती है। ऐसे मरीजों को अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों की मदद से सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया।
मरीजों को शिफ्ट करते समय उनके उपचार से संबंधित आवश्यक जानकारी, दवाइयों और मेडिकल रिकॉर्ड का भी ध्यान रखा गया, ताकि नए अस्पताल में उपचार जारी रखने में किसी तरह की परेशानी न हो।
डॉक्टर और स्टाफ की तत्परता से टली बड़ी अनहोनी
घटना के दौरान अस्पताल प्रबंधन, डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की तत्परता ने स्थिति को और गंभीर होने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समय रहते मरीजों को सुरक्षित स्थान पर निकाल लिया गया। खासकर गंभीर मरीजों को लेकर अस्पताल स्टाफ ने पूरी सावधानी बरती।
वहीं, डॉ. प्रतीक गंगवार की ओर से मरीजों के लिए तत्काल वैकल्पिक उपचार व्यवस्था उपलब्ध कराने के कदम की भी सराहना की जा रही है। मुश्किल समय में मरीजों को अपने अस्पताल में शिफ्ट कराकर उपचार जारी रखने की व्यवस्था ने परिजनों की चिंता काफी हद तक कम कर दी।
परिजनों ने कहा- ऐसे समय में मिली बड़ी राहत
मरीजों के परिजनों का कहना था कि अस्पताल में आग लगने की खबर सुनते ही उनके होश उड़ गए थे। सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर थी कि मरीजों को सुरक्षित कैसे निकाला जाएगा और उनका इलाज कैसे जारी रहेगा। ऐसे समय में डॉ. प्रतीक गंगवार और उनकी टीम की ओर से मदद के लिए आगे आना राहत भरा रहा।
परिजनों के मुताबिक, आग की स्थिति के बीच मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालना और फिर उनके उपचार की वैकल्पिक व्यवस्था करना बेहद जरूरी था। समय पर उठाए गए कदमों से मरीजों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सका।
इंसानियत की मिसाल बना डॉ. प्रतीक का कदम
नवोदय अस्पताल में लगी आग ने कुछ देर के लिए पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। अस्पताल परिसर में भगदड़ जैसी स्थिति और बाहर वाहनों की भीड़ के बीच हर किसी की नजर मरीजों की सुरक्षा पर थी। ऐसे वक्त में डॉ. प्रतीक गंगवार ने जिस तरह मरीजों की मदद के लिए आगे आकर उनके उपचार की व्यवस्था कराई, उसे मरीजों के परिजनों ने चिकित्सा सेवा के साथ इंसानियत की मिसाल बताया।
घटना ने एक बार फिर यह सवाल भी खड़ा किया है कि अस्पतालों में आग जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा इंतजाम कितने मजबूत हैं। हालांकि इस घटना में समय रहते मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने और वैकल्पिक अस्पताल में उपचार की व्यवस्था होने से बड़ी अनहोनी टल गई।
फिलहाल आग लगने की घटना के बाद अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और आग से बचाव के इंतजामों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। शॉर्ट सर्किट से लगी आग ने जहां कुछ समय के लिए मरीजों और तीमारदारों की सांसें रोक दीं, वहीं डॉक्टरों और स्टाफ की तत्परता ने हालात को संभालने में अहम भूमिका निभाई।

