आशाओं से साठगांठ कर गर्भवती को घर ले जाकर प्रसव कराने का आरोप, ₹10 हजार लेने की शिकायत

सवालों के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था—जिम्मेदारी सिर्फ नर्स की या निगरानी तंत्र की भी?
महेवागंज-खीरी।फूलबेहड़ सीएचसी में तैनात स्टाफ नर्स पर गर्भवती महिलाओं को कथित रूप से बहला-फुसलाकर निजी स्थान पर प्रसव कराने के गंभीर आरोप लगे हैं। श्रीनगर गांव निवासी अशोक कुमार ने पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को तहरीर देकर स्टाफ नर्स राजलक्ष्मी जायसवाल पर कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसकी पत्नी को सीएचसी से अपने घर ले जाकर प्रसव कराया गया, जिसके दौरान नवजात की मौत हो गई।
पीड़ित के अनुसार, रविवार रात उसकी पत्नी को प्रसव पीड़ा हुई। उसकी मां गांव की आशा के साथ गर्भवती महिला को फूलबेहड़ सीएचसी लेकर पहुंचीं। आरोप है कि रात में प्रसव नहीं हो सका। सोमवार सुबह ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स ने सामान्य प्रसव कराने की बात कहते हुए महिला को सदर क्षेत्र के सैधरी गांव स्थित अपने घर ले जाने को कहा।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि वहां कथित तौर पर ₹10 हजार लेकर प्रसव कराया गया। प्रसव के दौरान नवजात की मौत हो गई। बच्चे की मौत से परिवार में मातम छा गया। पीड़ित का आरोप है कि जब उसने नर्स से घटना को लेकर जानकारी मांगी तो उसे और उसकी पत्नी को वहां से जाने के लिए कहा गया।
शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची
मामले की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। एसीएमओ रवि मोहन, एसीएमओ आरएन गुप्ता, डिप्टी सीएमओ प्रमोद कुमार रावत और फूलबेहड़ सीएचसी अधीक्षक मनीष वर्मा मौके पर पहुंचे।
अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए नर्स के मकान में संचालित बताए जा रहे निजी क्लीनिक को सीज कर दिया।
सीएमओ संतोष गुप्ता ने बताया कि मामला संज्ञान में है और जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पहले से चर्चाओं में रही नर्स, अब फिर उठे सवाल
स्टाफ नर्स राजलक्ष्मी जायसवाल को लेकर स्थानीय स्तर पर पहले भी शिकायतें और चर्चाएं सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि पुराने मामलों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अब सवाल यह है कि यदि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में तैनात कर्मचारी के खिलाफ पहले भी शिकायतें या घटनाएं सामने आती रही हों, तो उन पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
कहावत है— ‘बाड़ ही खेत की रखवाली करे तो खेत की रखवाली कौन करेगा?’ यही सवाल अब स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी उठ रहा है।
जिम्मेदारी सिर्फ नर्स की या कार्रवाई न करने वालों की भी?
इस मामले में जिम्मेदारी का सवाल केवल स्टाफ नर्स तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यदि जांच में निजी स्थान पर प्रसव कराने, नियमों की अनदेखी या लापरवाही के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि ऐसी गतिविधियों की जानकारी विभागीय निगरानी तंत्र को पहले क्यों नहीं हुई।
यदि किसी कर्मचारी को लेकर बार-बार शिकायतें सामने आती रही हों और उसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई हो, तो संबंधित अधिकारियों की भूमिका और निगरानी व्यवस्था की भी पड़ताल जरूरी है।
सवाल सिर्फ यह नहीं कि गलती किससे हुई, सवाल यह भी है कि अगर पहले से संकेत मिल रहे थे तो उन्हें नजरअंदाज क्यों किया गया?
सरकारी स्वास्थ्य केंद्र गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए भरोसे का स्थान होते हैं। ऐसे में किसी कर्मचारी पर निजी स्तर पर प्रसव कराने और इसके एवज में रकम लेने जैसे आरोप लगना पूरे स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
अब लोगों की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। उम्मीद है कि जांच में ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ होगा और यदि किसी स्तर पर लापरवाही, नियमों की अनदेखी या शिकायतों पर कार्रवाई न करने की बात सामने आती है, तो संबंधित सभी जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होगी।
फिलहाल आरोप जांच के अधीन हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के निष्कर्ष के बाद ही होगी।
