हाथरस। उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग ने शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक आयोजित कर जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के प्रतिनिधित्व, आरक्षण तथा सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक एवं राजनीतिक स्थिति की जानकारी जुटाई।आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में आयोग प्रदेश के विभिन्न जनपदों का भ्रमण कर ओबीसी वर्ग के पिछड़ेपन की वास्तविक स्थिति का अध्ययन कर रहा है। आयोग जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों से प्राप्त सुझावों, आपत्तियों और प्रमाणिक तथ्यों के आधार पर सरकार को अपनी संस्तुतियां उपलब्ध कराएगा।बैठक में निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष/प्रशासक सीमा उपाध्याय सहित ब्लॉक प्रमुख, ग्राम प्रधान एवं अन्य जनप्रतिनिधियों से प्रश्नोत्तर के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में ओबीसी समुदाय की स्थिति, स्थानीय निकायों में भागीदारी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के संबंध में जानकारी ली गई। जनप्रतिनिधियों ने पिछड़ा वर्ग को संख्या के अनुपात में आरक्षण देने, शिक्षा के स्तर में सुधार, रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देने तथा युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के सुझाव दिए।मुख्य विकास अधिकारी ने आयोग को जनपद के भौगोलिक एवं प्रशासनिक विवरण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जनपद में 04 तहसील, 07 विकास खंड, 02 नगर पालिका परिषद, 07 नगर पंचायत, 462 ग्राम पंचायत एवं 658 राजस्व ग्राम हैं। ग्रामीण जनसंख्या 11,95,441 है।आयोग अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने कहा कि पिछड़ेपन की वास्तविक स्थिति का आकलन प्रमाणिक आंकड़ों, तथ्यों और जनसहभागिता के आधार पर किया जाएगा। जनपद से प्राप्त सूचनाओं एवं सुझावों का अध्ययन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे शासन को प्रस्तुत किया जाएगा। बैठक में आयोग के सदस्य बृजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा, डॉ. अरविन्द कुमार चौरसिया एवं एसपी सिंह सहित अधिकारी और बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
रिपोर्ट राजा पाठक

