
ब्यूरो चीफ रफीउल्लाह खान की रिपोर्ट
लोकेशन रामपुर
एमडी न्यूज़ बहुआयामी समाचार पत्र एवं
रामपुर। सिविल लाइंस स्थित गुरुद्वारा संत भाई जी बाबा जी (रजि.) में साहिब श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश पर्व श्रद्धा, प्रेम और गुरमत मर्यादा के साथ मनाया गया। प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा परिसर में कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में संगत ने पहुंचकर गुरबाणी का श्रवण किया और गुरु साहिब के चरणों में माथा टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया।
प्रकाश पर्व के कार्यक्रमों की शुरुआत 10 सितंबर 2026, गुरुवार को सुबह 9 बजे अखंड पाठ साहिब जी के शुभारंभ के साथ हुई। अखंड पाठ साहिब के दौरान संगत ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया। इसी क्रम में रात्रि दीवान का आयोजन किया गया, जिसमें कीर्तन दरबार एवं अरदास के माध्यम से गुरु साहिब की महिमा का गुणगान किया गया।
12 सितंबर 2026, शनिवार को अखंड पाठ साहिब जी की समाप्ति के उपरांत विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। सुबह 8:30 बजे से 9 बजे तक समापती श्री अखंड पाठ साहिब जी तथा इसके बाद सुबह 9 बजे से 9:30 बजे तक शब्द कीर्तन एवं अरदास हुई। संगत ने बड़ी श्रद्धा के साथ गुरबाणी का श्रवण किया और गुरु साहिब के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।
इस अवसर पर रात्रि 8 बजे से 10:30 बजे तक विशेष दीवान सजाया गया। विशेष दीवान में कीर्तन दरबार एवं अरदास का आयोजन किया गया। धार्मिक कार्यक्रमों के उपरांत संगत के लिए गुरु का अटूट लंगर बरताया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
आयोजक प्रबंधक कमेटी की ओर से बताया गया कि गुरु ग्रंथ साहिब जी की शिक्षाएं मानवता को प्रेम, भाईचारे, सेवा, समानता और सद्भावना का संदेश देती हैं। प्रकाश पर्व के अवसर पर संगत से अपील की गई कि वे गुरु साहिब की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाएं तथा समाज में आपसी प्रेम और भाईचारे को मजबूत करने में अपना योगदान दें।
प्रबंधक कमेटी ने सभी गुरसिख संगत, धर्मप्रेमी सज्जनों एवं नगरवासियों का कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया कि वे परिवार सहित गुरुद्वारा साहिब पहुंचकर गुरबाणी, कीर्तन एवं अरदास का लाभ लें और गुरु साहिब का आशीर्वाद प्राप्त करें।
कार्यक्रम का आयोजन समूह साध संगत अते प्रबंधक कमेटी, गुरुद्वारा संत भाई जी बाबा जी (रजि.), सिविल लाइंस, रामपुर की ओर से किया गया। प्रकाश पर्व के दौरान गुरुद्वारा परिसर में श्रद्धा और धार्मिक उत्साह का वातावरण बना रहा।

