रिपोर्ट शाहनूर आलम प्रयागराज मंडल सहायक ब्यूरो प्रमुख फतेहपुर
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फतेहपुर : देवमई विकासखंड की गलाथा ग्राम पंचायत के बेरीनारी और रामघाट गांव बाढ़ के पानी से घिरने के कारण मुख्य मार्ग से कट गए हैं। गांव के कई घरों में पानी घुस जाने से ग्रामीणों के सामने आवागमन के साथ ही रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ की स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन से नियमित निगरानी और राहत व्यवस्था मजबूत किए जाने की मांग की है।
बेरीनारी निवासी राजू ने बताया कि बाढ़ का पानी उनके घर में घुस गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्थिति गंभीर होने के बावजूद संबंधित अधिकारी प्रभावित गांवों में नियमित रूप से नहीं पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि अधिकारियों की आवाजाही मुख्य रूप से मलवां विकासखंड की अभयपुर और आशापुर ग्राम पंचायतों तक सीमित दिखाई दे रही है, जबकि देवमई ब्लॉक के बेरीनारी और रामघाट जैसे प्रभावित गांवों में पर्याप्त निगरानी नहीं हो रही है।ग्रामीणों ने मांग की कि बाढ़ प्रभावित गांवों में प्रशासनिक अधिकारी नियमित निरीक्षण करें और जरूरत के अनुसार सुरक्षित स्थान, भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं तथा पशुओं के चारे की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए। उधर, कानपुर नगर क्षेत्र के पूरवामीर में प्रस्तावित बाढ़ चौकी को लेकर भी अभी तक ठोस व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आई है। इस संबंध में देवमई बीडीओ ने बताया कि फिलहाल बाढ़ का पानी गांव के किनारे तक पहुंचा है। आवश्यकता पड़ने पर बाढ़ चौकी स्थापित की जाएगी। उन्होंने बताया कि मौके पर ग्राम पंचायत सचिव राम प्रताप और बीआरओ रवि की ड्यूटी लगाई गई है।
बिंदकी फार्म में बढ़ा मच्छरों का प्रकोप
मलवां विकासखंड की अभयपुर और आशापुर ग्राम पंचायत के बिंदकी फार्म क्षेत्र में चारों ओर पानी भरने से मच्छरों और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद ग्राम सचिव मोहम्मद असलम के प्रयास से क्षेत्र में एंटी लार्वा का छिड़काव और फॉगिंग कराई गई। ग्राम सचिव ने बताया कि लोगों को संक्रमण और मच्छरजनित बीमारियों से बचाने के लिए फॉगिंग व एंटी लार्वा का कार्य नियमित रूप से कराया जाएगा।
कालीकुंडी निवासी कमलेश ने बताया कि उनके परिवार में 22 सदस्य हैं। परिवार के साथ भैंस और बकरियों समेत कई पशु भी हैं। बाढ़ का पानी बढ़ने पर वह परिवार और पशुओं को लेकर दरियापुर बांगर पहुंच गए हैं। ग्रामीण अपने साथ पशुओं के लिए भूसा भी लेकर आए हैं। प्रशासन की ओर से पशुओं के लिए भूसे की व्यवस्था के सवाल पर कमलेश ने कहा कि वह हर वर्ष बाढ़ की स्थिति का सामना करते हैं। उन्हें प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए जाने वाले भूसे की मात्रा का अंदाजा है, इसलिए उन्होंने पहले से ही अपने स्तर पर पशुओं के चारे की व्यवस्था कर ली।
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों के लिए राहत की बात यह रही कि पिछले 24 घंटे में गंगा नदी के जलस्तर में करीब एक सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई है। हालांकि अभी भी कई गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। ग्रामीणों की नजर लगातार नदी के जलस्तर पर बनी हुई है और उन्हें पानी में और कमी आने का इंतजार है। ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित गांवों में नियमित निगरानी के साथ स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षित ठहरने की व्यवस्था, भोजन-पेयजल और पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने की मांग की है।

