PPT प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों ने समझी सूक्ष्मजीव विज्ञान की जटिल अवधारणाएं, ओजोन परत के संरक्षण को लेकर बढ़ाई जागरूकता
रिपोर्ट- विशाल कसौधन
निचलौल–महराजगंज। जब विज्ञान केवल किताबों के पन्नों तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों की जिज्ञासा और सवालों से जुड़ता है, तो सीखने की प्रक्रिया और भी प्रभावी हो जाती है। इसी उद्देश्य के साथ विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर सरस्वती देवी महाविद्यालय, निचलौल–महराजगंज में विज्ञान संकाय की ओर से “BACTERIOPHAGE & OZONE” विषय पर विशेष शैक्षणिक सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को सूक्ष्मजीव विज्ञान, बैक्टीरियोफेज, ओजोन तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण वैज्ञानिक पहलुओं की जानकारी दी गई।
सेमिनार के दौरान परितोष सर द्वारा तैयार की गई आकर्षक एवं तथ्यपरक PowerPoint Presentation (PPT) के माध्यम से विषय को सरल और वैज्ञानिक तरीके से विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति में वैज्ञानिक तथ्यों के साथ चित्रों और उदाहरणों का प्रयोग किया गया, जिससे विद्यार्थियों के लिए जटिल अवधारणाओं को समझना अपेक्षाकृत आसान रहा।

बैक्टीरियोफेज की संरचना और कार्यप्रणाली पर चर्चा
प्रस्तुति के दौरान विद्यार्थियों को Bacteriophage की संरचना, उसकी कार्यप्रणाली तथा बैक्टीरिया के साथ उसके संबंध के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। बताया गया कि बैक्टीरियोफेज ऐसे वायरस होते हैं जो बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं और सूक्ष्मजीव विज्ञान के अध्ययन में इनका विशेष महत्व है।
विषय को चित्रों और वैज्ञानिक तथ्यों के माध्यम से समझाए जाने से विद्यार्थियों में बैक्टीरियोफेज को लेकर उत्सुकता देखने को मिली। विद्यार्थियों ने इससे संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे और वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझने का प्रयास किया।

ओजोन के महत्व और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
सेमिनार में Ozone (O₃) के गुणों, उसके महत्व तथा पृथ्वी के पर्यावरण में ओजोन परत की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि पृथ्वी के वायुमंडल में मौजूद ओजोन परत सूर्य से आने वाली पराबैंगनी (UV) विकिरण के एक महत्वपूर्ण हिस्से को अवशोषित करती है, जिससे पृथ्वी पर जीवन की सुरक्षा में सहायता मिलती है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को ओजोन परत के संरक्षण, पर्यावरणीय जागरूकता और प्रकृति के प्रति जिम्मेदार वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का संदेश दिया गया।
दो अलग अवधारणाओं को एक व्यापक वैज्ञानिक संदर्भ में समझाया
सेमिनार में यह भी स्पष्ट किया गया कि बैक्टीरियोफेज और ओजोन अलग-अलग वैज्ञानिक अवधारणाएं हैं, लेकिन दोनों का अध्ययन सूक्ष्मजीव नियंत्रण तथा आधुनिक विज्ञान के व्यापक परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण है। इसी वैज्ञानिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को विषय की मूल अवधारणाओं से लेकर उनके व्यापक उपयोग और महत्व तक की जानकारी दी गई।
सवाल-जवाब में विद्यार्थियों ने दिखाई उत्सुकता
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही। प्रस्तुति के दौरान छात्र-छात्राओं ने विषय से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे तथा बैक्टीरियोफेज, ओजोन और पर्यावरणीय चुनौतियों पर चर्चा की। सवाल-जवाब के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त करने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विषय को समझने का अवसर मिला।
विज्ञान संकाय की इस पहल को विद्यार्थियों के लिए पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर विज्ञान को व्यावहारिक, आधुनिक और अनुसंधानात्मक दृष्टिकोण से समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया। सेमिनार के माध्यम से वैज्ञानिक चेतना के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य सुनील पांडेय, आदित्य सिंह, बृजेश उपाध्याय, मनोज यादव, अवनीश पांडेय, देवेंद्र पांडेय, दिव्य दीपक, विशाल कसौधन, संदीप, प्रमोद शर्मा, सर्वेश तिवारी, पल्लवी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
सेमिनार के समापन पर विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति जिज्ञासु बने रहने तथा पर्यावरण संरक्षण को अपनी दैनिक जिम्मेदारी का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया गया।
