औरैया – 17 सितंबर से 02 अक्टूबर 2022 तक मनाए जाने वाले सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत विविधता में एकता पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम तिलक महाविद्यालय में आयोजित किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि सदर विधायका मा० गुड़िया कठेरिया एवं विशिष्ट अतिथि जिलाधिकारी प्रकाश चन्द्र श्रीवास्तव द्वारा मां सरस्वती के चरणों में पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा विविधता में एकता पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम का प्रदर्शन किया गया। परिसर में उपस्थित सभी दर्शकों द्वारा तालियां बजाकर छात्र-छात्राओं का उत्साह वर्धन किया गया।


कार्यक्रम के दौरान मा० सदर विधायका ने बच्चों के कार्यक्रम की तारीफ करते हुए कहा कि विद्यालय के छात्र छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किए गए कार्यक्रमों से यह साबित हो गया है कि हमारा हिंदुस्तान सभी प्रकार के जाति-धर्म से ऊपर उठकर भारतीयता को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि विविधता में एकता-एक भारत, श्रेष्ठ भारत ही हमारी पार्टी का श्लोक मंत्र है। हमारे विधानसभा में नारी सशक्तिकरण को लेकर भी एकता प्रदर्शित होती है। जिससे सभी महिलाओं को सम्मान प्राप्त होता है। विविधता में एकता अनंत समय काल तक चलती रहे यही आज के युवा पीढ़ी से अपेक्षा है।
भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीराम मिश्रा ने अपने संबोधन में विद्यालय में पठन-पाठन करने वाले छात्र-छात्राओं में एकता रखने को ही विविधता में एकता का होने की बात कही। उन्होंने कहा कि दुनिया में भारत ही एक ऐसा देश है जहां कई प्रकार के जाति, धर्म, भाषाएं बोलने और रहने वाले लोग रहते हैं, परंतु फिर भी सभी के दिलों में भारत देश एक समान रुप में बसता है। इसी से हमारे देश की विविधता और एकता दोनों ही प्रदर्शित होती है। हमें आगे आने वाली पीढ़ी को भी पठन-पाठन, अध्ययन के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने की भी शिक्षा देनी होगी। जिलाधिकारी प्रकाश चन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि इसी सोच के तहत हमारे देश के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी ने 17 सितंबर से 02 अक्टूबर 2022 तक सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम की शुरुआत की थीl

जिसमें विविधता में एकता प्रदर्शित हो रही है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार स्वतंत्रता सप्ताह में जनपद की माताओं- बहनों ने भागीदारी की इसी प्रकार इस पखवाड़े को भी सभी जनपद वासियों ने भी सफल बनाया है और आगे भी सफल कार्य करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि हम सभी ह्रदय से भारतवासी हैं इसलिए सभी धर्म व जाति को हमें एक समान धारा में लेकर चलना है। बच्चों द्वारा दिखाए गए कार्यक्रम पर जिलाधिकारी ने बच्चों की तारीफ करने के साथ-साथ दर्शकों की भी धैर्यता को सराहा। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्यक्रम को सफल बनाने में दर्शक की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है और बिना दर्शक के कोई भी कार्यक्रम संपन्न नहीं हो सकता है। उक्त अवसर पर अपर जिलाधिकारी रेखा एस चौहान, जिला विद्यालय निरीक्षक चंद्रशेखर मालवीय, बेसिक शिक्षा अधिकारी विपिन कुमार, तिलक महाविद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षक व छात्र छात्राओं सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

हां रिपोर्टर रजनीश कुमार

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!