
38 वर्ष पुराना हैंडपंप उगल रहा है जहर, प्रशासन कर रहा है खानापूर्ति जनजीवन के साथ खिलवाड़, मगरेना में पेयजल संकट गहराया काला, झागदार, बदबूदार पानी पीने को मजबूर ग्रामीण, महामारी का खतरा – जल जीवन मिशन की टंकी 2 साल से शोपीस
रिपोर्टर प्रदीप पांडेय बदायूं
लखीमपुर-खीरी / मोहम्मदी। ग्राम पंचायत मगरेना में सार्वजनिक पेयजल की गंभीर लापरवाही सामने आई है। यहाँ लगा लगभग 38 वर्ष पुराना सरकारी इंडिया मार्का हैंडपंप आज जहर उगल रहा है। बस्ती के लोग इसी जहरीले पानी को पीने को मजबूर हैं, जबकि शासन-प्रशासन ने आँखें मूंद रखी हैं।क्या है पूरा मामला?मोहल्ले में लगा यह सार्वजनिक हैंडपंप पूरी तरह जर्जर और धंसा हुआ है। इसके अधिकांश पाइप गल कर खत्म हो चुके हैं और कुछ गायब हैं। महज 5 पाइप बचे होने से इसे जलस्तर नहीं मिल पा रहा है।सबसे खतरनाक बात यह है कि हैंडपंप के ठीक सामने से एक खुली कच्ची गंदी नाली बह रही है। नाली का काला, कचरे और सड़ांध भरा पानी सीधे हैंडपंप के चबूतरे और बोरिंग में रिस रहा है। इसी कारण हैंडपंप से काला, झागदार, बदबूदार और कीटाणु युक्त पानी निकल रहा है। ग्रामीणों को आशंका है कि पानी में लौह तत्व और नाली के संक्रमण से हैजा, पीलिया, डायरिया और टाइफाइड जैसी संक्रामक बीमारियाँ कभी भी महामारी का रूप ले सकती हैं।भीषण गर्मी में हालात और बदतर हैं। इस हैंडपंप पर बस्ती के गरीब मजदूर परिवार, विधवा श्रीमती इबराना पत्नी स्व. मोहम्मद सलीम और राहगीर निर्भर हैं। बिजली बाधित होने पर पूरे मोहल्ले में पानी का एकमात्र सहारा यही है।जल जीवन मिशन भी फेल:गांव में जल जीवन मिशन के तहत पानी की टंकी बने लगभग 2 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज तक एक बूंद जलापूर्ति शुरू नहीं हुई है। टंकी सिर्फ शोपीस बनकर खड़ी है।मुख्यमंत्री के आदेश की भी अवहेलना:सामाजिक कार्यकर्ता मिर्जा रबी बेग ने जनहित में इस मामले की शिकायत 11.09.2026 को मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (संदर्भ संख्या 40015326051618) पर दर्ज कराई थी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस पर संज्ञान लेते हुए मोहम्मदी ब्लॉक के सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को निस्तारण के आदेश दिए थे।आरोप है कि ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारियों ने मुख्यमंत्री कार्यालय के आदेश का उल्लंघन करते हुए रीबोर की जगह केवल खानापूर्ति के लिए मामूली रिपेयरिंग दिखा दी और मिस्त्री बिना रीबोर किए चले गए। आज दिनांक 30.09.2026 तक कोई ठोस समाधान नहीं हुआ है।अधिकारियों की अनदेखी:ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत सचिव दिलीप कुमार से कई बार शिकायत की, तो उन्हें सिर्फ तारीख पर तारीख दी गई। इसके बाद मिर्जा रबी बेग ने जिलाधिकारी, सीडीओ, जिला पंचायती राज अधिकारी और सीएमओ को ईमेल और ट्वीट के माध्यम से अवगत कराया। उत्तर प्रदेश सरकार और पंचायती राज निदेशालय लखनऊ को भी ट्वीट किया गया, पर अब तक कोई संज्ञान नहीं लिया गया।जब इस संबंध में विकासखंड अधिकारी अश्वनी कुमार सिंह को कई बार अवगत कराया गया तो उनके द्वारा कहा गया कि “बजट नहीं है”। सवाल यह उठता है कि क्या बजट नहीं होने पर एक छोटा सा जनहित का कार्य भी नहीं कराया जा सकता? इससे साफ पता चलता है कि सिस्टम कितनी लापरवाही बरत रहा है। एक तरफ सरकार जनहित के लिए पानी की तरह पैसा बहा रही है, वहीं संबंधित अधिकारी लगातार सरकार को बदनाम करने का कार्य कर रहे हैं।सामाजिक कार्यकर्ता की मांग:मिर्जा रबी बेग ने जनहित में मांग की है कि -1. उक्त हैंडपंप का तत्काल रीबोर कराकर 12 से 15 नए पाइप डाले जाएं और चबूतरा दुरुस्त किया जाए। 2. हैंडपंप के पानी की तत्काल सरकारी प्रयोगशाला में गुणवत्ता जांच कराई जाए। 3. जल स्रोत को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए बगल की नाली को पक्का कर ढकवाया जाए। 4. 2 वर्ष से बंद पड़ी जल जीवन मिशन की पानी टंकी की जलापूर्ति तत्काल शुरू कराई जाए। 5. जनस्वास्थ्य के प्रति घोर लापरवाही बरतने वाले संबंधित कर्मचारियों और ठेकेदार की जवाबदेही तय कर निष्पक्ष जांच कराई जाए।
