
रिपोर्टर कैलाश यदुवंशी
छाता (मथुरा): छाता चीनी मिल को पुनः शुरू कराने की मांग को लेकर चल रहा धरना प्रदर्शन 51वें दिन भी जारी रहा। इस बीच धरने को समाप्त कराने और कमजोर करने के तमाम प्रयास किए जाने की बात सामने आ रही है। देर शाम आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान स्वामी सच्चिदानंद ने विरोधियों और फर्जी खबरें चलाने वालों पर जमकर निशाना साधा।
स्वामी सच्चिदानंद ने कहा कि छाता चीनी मिल धरना उनका अपना धरना है और वे जवान तथा किसानों की आवाज के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नामचीन मीडिया चैनल उनके खिलाफ भ्रामक और फर्जी खबरें चला रहे हैं, जबकि इन लोगों का 51 दिनों में इस धरने से कोई सरोकार नहीं रहा और न ही वे कभी यहां दिखाई दिए।
उन्होंने बताया, “कल जब मैं बरसाना में प्रदीप मिश्रा जी की कथा में स्वामी रामदेव जी के साथ मंच पर था, तो तानाशाही सोच वाले लोगों की जड़ें हिलने लगीं। धरने में मेरी सक्रियता से परेशान होकर विरोधियों के पास जब कोई मुद्दा नहीं बचा, तो उन्होंने साजिश के तहत अपने लोगों को धरना स्थल पर भेजा। जैसे ही मैं मंच पर पहुंचा, कुछ लोग उग्र होने की कोशिश करने लगे और यह अफवाह फैलाने लगे कि स्वामी सच्चिदानंद धरने से भाग गए।”
इस पर पलटवार करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया, “छाता मेरा अपना गांव है और वहां बैठे सभी समर्थक मेरे अपने लोग हैं। मैं विरोधियों की इस साजिश को भली-भांति समझ गया था कि वे किसी भी तरह इस धरने को खत्म कराना चाहते हैं। इसीलिए मैंने सभ्यता और शिष्टता का परिचय देते हुए वहां से हटना ही उचित समझा, ताकि धरना बिना किसी बाधा के निरंतर चलता रहे।”
स्वामी सच्चिदानंद ने जोर देकर कहा कि इस पूरे आंदोलन का एकमात्र उद्देश्य बंद पड़ी गन्ना मिल को चालू कराना है और इस पर किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए।
खुद को पाखंड का विरोधी और समाज सुधारक बताते हुए उन्होंने कहा, “मैं भगवान श्रीकृष्ण का वंशज हूं। जब भगवान श्रीकृष्ण पर लांछन लगाए गए थे, तो ऐसे लोगों द्वारा मुझ पर सवाल उठाना कोई बड़ी बात नहीं है। मैं इन षड्यंत्रों और अभियानों से डरने वाला नहीं हूं। मैं इससे पहले भी तीन बार धरने में जा चुका हूं, जहां मुझे अपार सम्मान मिला है। आगे भी किसानों के हक के लिए आता रहूंगा।”
