
गोंडी संस्कृति पर्व दशहरा महोत्सव में प्रकृति संरक्षण और विश्व कल्याण का लिया संकल्प
जंगो लिंगो लाटी गोंगो पर्व पर पारंपरिक विधि से हुआ अनुष्ठान, पुरखों के शौर्य और पराक्रम का किया स्मरण
वाराणसी। जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान की ओर से मंगलवार को गणेशपुर, शिवपुर स्थित संस्थान परिसर में जंगो लिंगो लाटी गोंगो एवं गोंडी संस्कृति पर्व दशहरा महोत्सव का आयोजन किया गया। येरोमान कुवांर मास के उजियारा पाख के अवसर पर आयोजित इस महोत्सव में गोंडी परंपराओं, आदिम संस्कृति के संरक्षण और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश दिया गया।
महोत्सव का शुभारंभ गोंडी विधि-विधान से जंगो लिंगो लाटी देवता की पूजा-अर्चना के साथ हुआ। इस दौरान जल, जंगल और जमीन सहित प्रकृति चक्र के संरक्षण तथा विश्व कल्याण की कामना से विशेष अनुष्ठान किया गया। गोंड आदिवासी समाज के 750 टोटम चिह्नों की स्थापना के बाद फड़ापेन एवं नारूंग दाई का स्मरण किया गया।
आयोजकों के अनुसार, इस प्राचीन पर्व का उद्देश्य समस्त जनसमुदाय के कल्याण और मंगल की कामना करना है। इसके माध्यम से गोंड आदिवासी समाज अपनी संस्कृति, रीति-रिवाजों और परंपराओं को जनमानस तक पहुंचाता है। पर्व पर सगा-संग्गुम के बीच पारिवारिक मिलन और गोत्र के माध्यम से सामाजिक संबंधों को मजबूत करने की परंपरा भी निभाई जाती है। इस अवसर पर आदिवासी समाज के लोग अपने पुरखा-पेन राजाओं के शौर्य और पराक्रम को पारंपरिक गीतों के माध्यम से याद करते हैं।
कार्यक्रम में जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान के सचिव एवं प्रबंधक डॉ. बृजभान मरावी, समाजसेवी दिनेश मरकाम, गब्बर, बाबूलाल, विनोद कुमार, प्रीतम गोंड, बलिराम, पंकज कुमार, अनिल गोंड, शिवम गोंड, मनकेशरा देवी, मीना देवी, ज्योति गोंड और सिद्धार्थ सिंह मरावी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
