बुनकरों की मजदूरी में 40 प्रतिशत वृद्धि की मांग, धन्नीपुर में बनी बुनकर संघर्ष समिति

सूरत की साड़ियों को बनारसी बताकर बेचने पर जताई चिंता, महंगाई और पलायन रोकने के लिए संगठन मजबूत करने पर जोर

वाराणसी। लोहता क्षेत्र के ग्राम सभा धन्नीपुर में बुनकर मजदूरों और कारीगरों की एक अहम बैठक ग्राम प्रधान फकीर अली की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में महंगाई, बेरोजगारी, बुनकरों के पलायन, मजदूरी और सूरत की साड़ियों के नाम पर बनारसी साड़ियों की बिक्री जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान बुनकरों और कारीगरों के हितों की रक्षा के लिए बुनकर संघर्ष समिति धन्नीपुर का गठन किया गया।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि बनारस के कई खुदरा दुकानदार और गद्दीदार सूरत की साड़ियों को बनारसी साड़ी बताकर ग्राहकों को बेच रहे हैं। इससे ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी होने के साथ ही बनारस की साड़ी की पहचान और स्थानीय कारोबार को नुकसान पहुंच रहा है। इस समस्या पर समाज के लोगों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
बिस्मिल्ला अंसारी ने कहा कि गिरहस्ता और कारीगर, दोनों की कमियों का असर बुनकरी कारोबार पर पड़ रहा है। पार्षद रमजान अली ने कहा कि श्रम कानूनों के तहत निर्धारित मजदूरी और काम के घंटों का पालन होना चाहिए। उन्होंने डिजाइन की नकल कर दूसरे से काम कराने के मामले में भी कानूनी पहलुओं पर ध्यान देने की बात कही।
पार्षद हाजी ओकास अंसारी ने महंगाई का हवाला देते हुए कहा कि समाज के जिम्मेदार और आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को कारीगरों की मजदूरी में कम से कम 40 प्रतिशत की वृद्धि करनी चाहिए। शमीम अंसारी ने सुझाव दिया कि बुनकर और कारीगर क्षेत्रवार अपनी कमेटियों का गठन करें, ताकि उनकी सामूहिक ताकत मजबूत हो सके।
फजलुर रहमान अंसारी ने कहा कि बुनकरों का पलायन तभी रुकेगा, जब वे संगठित होकर अपनी मांगों को प्रभावी ढंग से उठाएंगे। संगठन के माध्यम से मजदूरी बढ़ाने और अन्य समस्याओं के समाधान के लिए दबाव बनाया जा सकता है। अकील अंसारी ने कहा कि समाज की सबसे बड़ी कमजोरी एकजुटता का अभाव है। दूसरे व्यापारों की तरह बुनकर मजदूरों और गिरहस्तों को भी अपना मजबूत संगठन बनाकर आवाज बुलंद करनी चाहिए।
बुनकर संघर्ष समिति धन्नीपुर का गठन
बैठक के अंत में इदरीस अंसारी ने सभी उपस्थित लोगों के प्रति आभार जताया। इसके बाद बुनकर संघर्ष समिति धन्नीपुर का गठन किया गया। समिति को बुनकरों और कारीगरों की मजदूरी बढ़ाने सहित उनकी अन्य समस्याओं के समाधान के लिए काम करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
समिति में मुबारक अली को अध्यक्ष, अफसर अहमद को सचिव और लिहालुद्दीन को खजांची बनाया गया। इसके अलावा समसुद्दीन महतो, रियासत अली, अरमान अली, मुबारक बाबा, इस्लामुद्दीन, शब्बीर अली, मोहम्मद कैफ, मुबारक सुजा, मैनुद्दीन उर्फ छोटा सुजा, सुल्तान अंसारी और जमाल अख्तर को सदस्य के रूप में जिम्मेदारी दी गई।
बैठक में अब्दुल रब अंसारी, तफज्जुल अंसारी, मुख्तार अंसारी, आलम अंसारी, कवी अंसारी, सगीर अंसारी, बाबू अंसारी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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