MD NEWS बहुआयामी समाचार संवाददाता मुनेश कुमार सहसवान (बदायूं)
बदायूं। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के नाम पर चलाए जा रहे पौधारोपण अभियानों की जमीनी हकीकत पर मालपुर तातेरा वनखंड में सवाल खड़े हो रहे हैं। वनखंड में शीशम का एक पेड़ कटा हुआ मिला है, जिसका ठूंठ मौके पर मौजूद बताया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर करीब दो एकड़ क्षेत्र में प्लांटेशन होने के बावजूद बड़ी संख्या में पौधे पड़े होने की बात सामने आई है। ऐसे में वन विभाग की निगरानी व्यवस्था से लेकर पौधारोपण के दावों तक पर सवाल उठने लगे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दो एकड़ क्षेत्र में पहले ही पौधारोपण किया जा चुका है, तो फिर इतनी बड़ी संख्या में पौधे किस उद्देश्य से मंगाए गए? क्या पौधारोपण के नाम पर निर्धारित लक्ष्य और वास्तविक स्थिति में कोई अंतर है? पौधों की खरीद, आपूर्ति और रोपण का पूरा हिसाब क्या विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज है? यदि पौधे लगाए जाने थे तो वे जमीन पर रोपित होने के बजाय मौके पर क्यों पड़े हैं?

पेड़ कटने की जानकारी किसे थी?
वनखंड में शीशम का पेड़ कटने और उसका ठूंठ मिलने का मामला भी कम गंभीर नहीं है। वन क्षेत्र में पेड़ों की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? पेड़ किन परिस्थितियों में काटा गया? क्या इसकी अनुमति ली गई थी? यदि बिना अनुमति पेड़ काटा गया है तो अब तक जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? इन सवालों पर विभाग की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
सरकारी धन और पर्यावरण संरक्षण के दावों की हो जांच
आज पर्यावरण असंतुलन, बढ़ते तापमान और घटती हरियाली के बीच पौधारोपण केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरत है। ऐसे में पौधों का उपयोग सुनिश्चित करने के बजाय उनका मौके पर पड़े रहना गंभीर चिंता का विषय है। यदि पौधारोपण के लिए सरकारी धन खर्च हुआ है तो प्रत्येक पौधे का हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए।
मामले में पौधों की खरीद के बिल, आपूर्ति का रिकॉर्ड, पौधारोपण की वास्तविक संख्या, स्थल निरीक्षण रिपोर्ट और शीशम के पेड़ के कटने की जांच कराई जानी चाहिए। जरूरत है कि वरिष्ठ वन अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थलीय सत्यापन करें और जिम्मेदारी तय करें।
अब सवाल सिर्फ एक पेड़ कटने का नहीं, बल्कि दो एकड़ प्लांटेशन और पौधारोपण के पूरे हिसाब का है। वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इन सवालों का जवाब देंगे या फिर मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा?
