21 अक्टूबर को भी नहीं हो पाई थी प्रस्तावित पैमाइश, पहले शिकायत का निस्तारण किए जाने पर उठे सवाल; आदेश त्यागी लगातार लगा रहे हैं निष्पक्ष जांच की गुहार
MD NEWS बहुआयामी समाचार
जिला सहायक ब्यूरो प्रमुख – रोहित जैन (दभेड़ी वाले)
बुढ़ाना, जनपद मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश।
बुढ़ाना। जनपद मुजफ्फरनगर के कस्बा बुढ़ाना में खसरा संख्या 2777 की जमीन पर कथित अवैध कब्जे का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। योगपुरम मंदिर के पास स्थित इस जमीन को लेकर अब प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हुई है। मामले में लगातार आवाज उठा रहे आदेश त्यागी की शिकायतों के बाद अपर जिलाधिकारी गंभीर सिंह द्वारा एसडीएम बुढ़ाना से फोन पर जांच कराने के लिए कहे जाने की जानकारी सामने आई है। अब सोमवार को जांच कराए जाने का आश्वासन मिलने की बात कही जा रही है।

जानकारी के अनुसार, आदेश त्यागी इस जमीन की वास्तविक स्थिति और कथित अवैध कब्जे की जांच कराने के लिए कई बार अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं। वह इस संबंध में मुजफ्फरनगर पहुंचकर अपर जिलाधिकारी से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात भी कर चुके हैं। इसके बावजूद प्रकरण में जांच की प्रक्रिया लगातार आगे-पीछे होती रही। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच के नाम पर तारीखें तो निर्धारित की जाती हैं, लेकिन मौके पर वास्तविक पैमाइश नहीं हो पा रही है।

21 अक्टूबर को भी नहीं हुई जांच, पहले शिकायत के निस्तारण पर सवाल
इस मामले में पिछले दिनों 21 अक्टूबर को जांच और पैमाइश होने की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार निर्धारित तिथि पर भी जांच नहीं हो सकी। इससे पहले की गई शिकायत का निस्तारण किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर बिना मौके पर निष्पक्ष जांच और पैमाइश के शिकायत का निस्तारण किस आधार पर किया गया, यह अपने आप में महत्वपूर्ण सवाल है।
एडीएम गंभीर सिंह के फोन के बाद फिर जगी जांच की उम्मीद
अब इस मामले में नया मोड़ तब आया जब अपर जिलाधिकारी गंभीर सिंह ने एसडीएम बुढ़ाना को फोन कर खसरा संख्या 2777 के प्रकरण में जांच कराने के निर्देश दिए। इसके बाद सोमवार को जांच कराए जाने का समय दिए जाने की जानकारी सामने आई है। अब देखना होगा कि राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर जमीन की पैमाइश करती है या फिर एक बार फिर जांच की तारीख आगे बढ़ जाती है।

नगर पंचायत की कार्यशैली पर भी उठ रहे सवाल
बुढ़ाना नगर पंचायत में निर्माण कार्यों और कथित अनियमितताओं को लेकर भी लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। अधिशासी अधिकारी आलोक रंजन की कार्यशैली पर शिकायतकर्ता पक्ष द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। सवाल यह भी है कि जब बार-बार शिकायतें अधिकारियों तक पहुंच रही हैं, तो उन पर समयबद्ध कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही?

जनता पूछ रही है—आखिर कब मिलेगा न्याय?
खसरा संख्या 2777 की जमीन की राजस्व अभिलेखों के अनुसार स्थिति क्या है? मौके पर वास्तविक कब्जा किसका है? पहले की शिकायत का निस्तारण किस आधार पर हुआ? 21 अक्टूबर को जांच क्यों नहीं हो सकी? और अब सोमवार को होने वाली जांच में क्या वास्तव में निष्पक्ष पैमाइश होगी?
इन सवालों का जवाब अब प्रशासन की जांच रिपोर्ट से ही सामने आएगा। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा, अपर जिलाधिकारी गंभीर सिंह और एसडीएम बुढ़ाना से अपेक्षा है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर राजस्व अभिलेखों एवं मौके की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए। यदि किसी स्तर पर सरकारी या सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा प्रमाणित होता है तो नियमानुसार कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।
अब बुढ़ाना की जनता की निगाहें सोमवार की जांच पर टिकी हैं। देखना यह है कि खसरा संख्या 2777 के मामले में इस बार जांच जमीन पर उतरती है या फिर शिकायत और आश्वासन का सिलसिला यूं ही जारी रहता है।
