बिंदकी फतेहपुर कस्बे में संगीतमयी राम कथा का शुभारंभ हुआ जिसमें बोलते हुए बाल व्यास हरिदास जी महाराज ने जहां राम के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला वहीं उनके द्वारा प्रतिस्थापित आदर्शों की सर्वकालिक प्रासंगिकता पर भी प्रमुखता से विचार व्यक्त किए। बिंदकी के मीरखपुर मोहल्ले में प्रारंभ हुई तीन दिवसीय रामकथा के प्रथम दिन विधिवत पूजन के पश्चात रामकथा में अपना उद्बोधन करते हुए हरिदास जी महाराज ने कहा कि परमात्मा तो कण-कण में है वह आत्मा से विलग नहीं है,आवश्यकता अपनी भक्ति व समर्पण से उनके साक्षात्कार की है।राम तो सर्वज्ञ हैं और सर्वत्र समान भाव से व्याप्त हैं,उन्हें प्रेम प्रिय है,वह प्रेम से ही प्रकट होते हैं।उन्होंने कहा कि परमात्मा मूलतः अमूर्त है जो भक्ति और प्रेम से मूर्त रूप लेकर अपना दिग्दर्शन कराता है।एक राम दशरथ के यहां थे तो एक राम सब में हैं। बाल व्यास ने प्रेम भक्ति और समर्पण के विविध आयाम वह प्रसंगों को सुनाते हुए द्वापर में कान्हा और गोपियों के प्रेम को भी रेखांकित किया।परमात्मा भक्तों के वशीभूत हो निर्गुण सगुण रूप लेकर लोक कल्याण करता है।हरिदास जी महाराज ने कहा कि मानव योनि में जन्म बहुत ही दुर्लभ है और यदि प्रभु की कृपा से हमें मानव जीवन मिला है तो उसका सदुपयोग करना चाहिए।धर्म और अध्यात्म के बताए मार्ग पर चलकर अपना लोक और परलोक सुधारना चाहिए।कथा में संगीत की धुनों के बीच तमाम चौपाइयां, दोहे और भजन भी सुनाए गए जिससे श्रोता भाव विभोर होते रहे।कार्यक्रम के संयोजक रमेश ओमर ने व्यास पीठ की पूजा अर्चना की और श्रोताओं को प्रसाद वितरित किया।
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