बहुआयामी शिक्षा तकनीकी एवं अनुसंधान समिति यह शैक्षिक तकनीकी अनुसंधान सोसाइटी शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए एक गैर-लाभकारी, पेशेवर संगठन है। 2017 में स्थापित यह सोसाइटी शिक्षा, उद्योग और सरकार के लगभग 100 से अधिक शोधकर्ताओं का सदस्य-संचालित संगठन है। सोसाइटी का मिशन शिक्षा तकनीकों और अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार के लिए अंतःविषय वैज्ञानिक अनुसंधान की उन्नति के लिए शिक्षा और संचार को बढ़ावा देना है।

बहुआयामी शिक्षा तकनीकी एवं अनुसंधान समिति में शामिल होने के लिए हम आप का स्वागत करते हैं – यह समिति विज्ञान, भौतिक विज्ञान, जीवन विज्ञान, इंजीनियरिंग और विशेष रूप से नैनो, और कृषि के किसी भी क्षेत्र में शिक्षा तकनीक और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन (NGO) है। पशु चिकित्सा विज्ञान, सौंदर्य प्रसाधन विज्ञान, सिनर्जी, चिकित्सा विज्ञान, शिक्षा, खाद्य और पोषण, स्वास्थ्य, सामाजिक विज्ञान, कला और मानविकी, आपदा, खेल विज्ञान, आध्यात्मिक विज्ञान, उन्नत कम्प्यूटिंग और रोबोटिक्स, विज्ञान और अनुसंधान के विषयों के सभी अन्य क्षेत्रों में कार्य व सहयोग करती है । सोसायटी के सदस्य विज्ञान अनुसंधान और विकास के सभी क्षेत्रों में काम करते हैं, ज्यादातर नैनो विज्ञान और नैनो प्रौद्योगिकी में भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित और इंजीनियरिंग है । सोसायटी अपनी बैठकों, प्रकाशनों और नेटवर्किंग और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किए गए अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से सभी विषयों पर विचार विनिमय के लिए एक सहयोगी वातावरण प्रदान करता है।

सोसायटी अपने सदस्यों और समुदाय के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने के लिए बैठकें करती है, सोसायटी तकनीकी जानकारी और नेटवर्क आदि का आदान-प्रदान करती है और अनुसंधान की प्रगति में योगदान देती है। सोसाइटी द्वारा आयोजित बैठकें भारत के किसी भी शहर में आयोजित की जा सकती हैं, जिसमें व्यावसायिक विकास, सरकार की नीतियां और वित्त पोषण के अवसर, छात्र गतिविधियां, पुरस्कार वार्ता और विशेष कार्यक्रम शामिल हैं। इनमें से प्रत्येक बैठक में अधिकतम शोधकर्ताओं, इंजीनियरों और वैज्ञानिकों ने भाग लिया है। आगे भी भाग लेते रहेंगे। विज्ञान के स्थायी वित्त के लिए सोसायटी के वकील सार्वजनिक-नीति चर्चा के लिए एक मंच प्रदान करते हैं, खुद को नीति निर्माताओं के लिए एक वैज्ञानिक संसाधन, और उभरते सार्वजनिक नीति के मुद्दों, संघीय कार्यक्रमों और इसके महत्व के रूप में प्रस्तुत करते हैं। सोसाइटी के सदस्यों को अन्य गतिविधियों के बारे में समय पर जानकारी देता है।

सदस्यता के लाभ

शासन के मानक के अनुसार समिति के द्वारा दिए जाने वाले लाभ : –

नि:शुल्क 3,6, व 12 माह के लिए निबंध शोध / परियोजना रिपोर्ट का प्रबंधन करना, थीसिस / रिसर्च पेपर्स / समीक्षा लेख / परियोजना रिपोर्ट प्रकाशित करना, अनुसंधान पत्रों / पत्रिकाओं / समीक्षा लेख उपलब्ध कराना, I.S.B.N. व I.S.N. उपलब्ध कराना, विज्ञान विषय के लिए नि:शुल्क पुस्तकों को अग्रेषित करना, शिक्षण व प्रशिक्षण देना व प्राप्त करना, स्वतंत्र भारत के किसी भी शिक्षण संस्थान की लाइब्रेरी का प्रयोग करना, विशेष योग्यता के लिए एक नि: शुल्क सराहना प्रमाण पत्र प्राप्त करना, बहु-आयामी नैनो विज्ञान पत्रिका प्राप्त करना, समिति के द्वारा हो रहे सेमीनार /कॉन्फ्रेंस में मुफ़्त भागीदारी प्राप्त करना, शोध करने वाले छात्रों को निःशुल्क शोध प्रशिक्षण प्रदान करना, CSIR/NET/JRF और UGCNET/JRFDH की तैयारी कर रहे छात्रों को मुफ्त अध्ययन सामग्री प्रदान करना, समिति के पुस्तकालय में आजीवन मुफ़्त सदस्यता प्राप्त करना, आपके द्वारा की गयी शिक्षा तकनीक एवं अनुसंधान से सम्बन्धित वीडियो ग्राफ़ी को निःशुल्क प्रकाशित कराना, मुफ्त में मीडिया / प्रेस / समाचार में शिक्षा तकनीकों और अनुसंधान संबंधित कार्यों को प्रकाशित करना, समिति के द्वारा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों का निर्माण कराना, समिति के द्वारा कॉपी राइट /पेटेन्ट प्रक्रिया में सहायता प्रदान कराना, समिति के द्वारा प्रेस / मीडिआ / रिपोर्टर आदि का आई० डी० कार्ड मुफ़्त प्राप्त करना।

By admin_kamish

बहुआयामी राजनीतिक पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!