प्रयागराज:यूपी बोर्ड ने शुक्रवार को वार्षिक शैक्षिक कैलेंडर जारी कर दिया। मई में प्रथम मासिक टेस्ट के बाद पूरे सत्र में कमजोर बच्चों के लिए उपचारात्मक शिक्षण की व्यवस्था की गई है। बोर्ड परीक्षाओं की बेहतर तैयारी के उद्देश्य से जनवरी में विद्यार्थियों की समस्याओं और जिज्ञासाओं के समाधान के लिए विद्यालय के शिक्षकों द्वारा जिज्ञासा-ऑन कॉल का संचालन किया जाएगा।

प्रत्येक स्कूल में बनायी जाएगी सुविचार पंजिका

प्रत्येक स्कूल में आज के सुविचार की एक पंजिका बनाई जाएगी और महीने के अंत में सर्वश्रेष्ठ सुविचार प्रस्तुत करने वाले विद्यार्थी को प्रार्थना सभा में सम्मानित किया जाएगा। कक्षा नौ से 12 तक के प्रत्येक विद्यार्थी का कॅरियर गाइडेंस पोर्टल पंख पर पंजीकरण कराएंगे जिसके जरिए विद्यार्थियों को अपनी अभिरुचि के अनुरूप कॅरियर संबंध निर्णय लेने में सहायता मिलेगी। नियमित पठन-पाठन में ई-मेल आईडी के व्यवहारिक प्रयोग को बढ़ावा देंगे। तीन दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर कार्यक्रमों का आयोजन होगा और 22 दिसंबर को महान गणितज्ञ रामानुजन की जयंती पर मेंटल मैथ्स से संबंधित प्रश्नोत्तरी/तार्किक अभिरुचि/पजल गतिविधियां आयोजित होंगी ताकि विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन एवं समस्या समाधान की प्रवृत्ति विकसित हो सके।

फरवरी में करायी जाएंगी बोर्ड परीक्षाएं

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने शैक्षिक सत्र 2023-24 के लिए तिथिवार शैक्षिक कैलेंडर जारी किया है। वर्ष 2024 की यूपी बोर्ड परीक्षा फरवरी में कराई जाएगी। अर्द्धवार्षिक परीक्षा सितंबर माह तक निर्धारित पाठ्यक्रम के आधार पर अक्टूबर 2023 के द्वितीय और तृतीय सप्ताह में होगी।

इस नए सत्र में बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने कई नए पहलुओं का समावेश किया है, जिससे विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति लगाव बढ़े और वह प्रतिस्पर्धा की चुनौतियों से दृढ़ता से निपट सकें। नए सत्र में नया सवेरा कार्यक्रम को भी कैलेंडर में शामिल किया गया है।

पहली बार होंगी ये गतिविधियां

👉आज के सुविचार की बनेगी पंजिका । सर्वश्रेष्ठ सुविचार प्रस्तुत करने वाले विद्यार्थी को प्रार्थना सभा में सम्मानित किया जाएगा।

👉एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) के उत्पादों का विद्यार्थी यथासंभव प्राथमिकता से उपयोग करें, इसके लिए जिला स्तर पर होने वाले शिल्प मेलों व ओडीओपी पर आधारित प्रदर्शनी का भ्रमण विद्यार्थियों को कराया जाए। इससे उनमें स्वावलंबन तथा व्यावसायिक विकसित होगा। अभिरुचि की भावना बढ़ेगी।

👉 कक्षा नौ से 12 तक के प्रत्येक विद्यार्थी का करियर गाइडेंस पोर्टल ‘पंख’ पर पंजीकरण कराया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को अपनी अभिरुचि के अनुरूप करियर संबंधी निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।

👉विद्यालय के वार्षिकोत्सव में पुरातन छात्रों को भी आमंत्रित किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों में अपने विद्यालय के प्रति विश्वास एवं गौरव भाव दृढ़ होगा।

👉नए सत्र में नया सवेरा कार्यक्रम का शुभारंभ प्रत्येक सप्ताह में दो दिन शिक्षाधिकारी प्रातः कालीन सभा में विद्यार्थियों से जीवन मूल्यों, अनुशासन, करियर, नियमित दिनचर्या आदि विषयों पर प्रेरक संवाद करेंगे। विद्यालयों के पुरा छात्रों एवं विभिन्न क्षेत्रों में सफल व्यक्तियों को भी आमंत्रित किया जाएगा।

👉तीन दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस’ के अवसर पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों में दिव्यांग सहपाठियों/ शिक्षकों/ कर्मियों तथा आस-पास के दिव्यांगजनों के प्रति सम्मान एवं सहज दृष्टिकोण

👉22 दिसंबर को महान गणितज्ञ रामानुजन के जन्मदिन पर विद्यार्थियों के लिए ‘मेंटल मैथ्स’ से सम्बंधित प्रश्नोत्तरी / तार्किक अभिरुचि के आयोजन होंगे। इससे उनमें तार्किक चिंतन एवं समस्या समाधान की प्रवृत्ति विकसित हो सकेगी।

👉 नियमित पठन-पाठन में ई-मेल आइडी के व्यावहारिक प्रयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे विद्यार्थी ईमेल का प्रयोग दैनिक जीवन की आवश्यकताओं में भी सहजता से कर पाने में सक्षम हो सकेंगे।

👉मई माह में प्रथम मासिक टेस्ट के उपरान्त संपूर्ण सत्र में कमजोर विद्यार्थियों के लिए उपचारात्मक शिक्षण की व्यवस्था की गयी है।

👉बोर्ड परीक्षाओं की बेहतर तैयारी के उद्देश्य से जनवरी में विद्यार्थियों की समस्याओं और जिज्ञासाओं के समाधान के लिए शिक्षक जिज्ञासा- आन काल का संचालन करेंगे।

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!