भारत की प्रतिष्ठित बहुआयामी शिक्षा तकनीकी एवं अनुसंधान ऑर्गेनाइजेशन के द्वारा उत्तर प्रदेश के जिला ब्यूरो चीफ व पत्रकार बंधुओं की बहुआयामी समाचार के माध्यम से ऑनलाइन बैठक का सफलतापूर्वक आयोजन


बैठक का आयोजन जनपद महाराजगंज से प्रदेश मीडिया हेड श्रीमान धर्मेंद्र कुमार कसौधन जी के माध्यम से किया गया जिस में जुड़ने वाले समस्त पत्रकार बंधुओं से पत्रकारिता की महत्वता के बारे में तथा संस्था की ओर से पत्रकारिता के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाने वाले साथियों को संस्था की ओर से समय रहते नियुक्ति पत्र, अधिकार पत्र आईडी कार्ड, व माइक आईडी उपलब्ध कराने की भी बात कही गई जिन्होंने पत्रकारिता के महत्व को संस्था की ओर से बनाई गई टर्म एंड कंडीशन को भली भांति प्रकाश डालते हुए उजागर किया वहीं संस्था के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सैयद अजीम अहमद जी के द्वारा पत्रकारिता के चलते बहुआयामी प्रकाशक के द्वारा पब्लिश किए गए पोर्टल पर न्यूज़ किस प्रकार से लगानी है वीडियोग्राफी कैसे प्रदर्शित करनी है फीचर इमेज का प्रदर्शन कैसे होना है इमेज का आर्टिकल नया पैराग्राफ बोर्ड टाइटल का प्रयोग का सफलतापूर्वक रिप्रेजेंटेशन किया गया जिनमें अनेक साथियों ने पोर्टल पर न्यूज़ लगाना भली-भांति सीखा व समझा साथियों के साथ द्वारा अनेक प्रकार के प्रश्न खड़े किए गए जिसको संस्था के उच्च पदाधिकारियों के द्वारा समझाया गया।


वहीं संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमान के एम आमिश जी के द्वारा हाल ही में शुरू किए गए बहुआयामी समाचार के नाम से सेटेलाइट चैनल चलाने का भी रोड मैप बताते हुए प्रत्येक टीवी चैनलों पर संस्था का लोगो दिखाने व समाज में पनप रही विभिन्न प्रकार की जमीनी हकीकतों को बयान करने की तथा समस्या का समाधान करने की भी बात कही गई। पत्रकारिता के क्षेत्र में जुड़ रहे जिला ब्यूरो चीफ को अहम भूमिका के साथ साथ में संस्था की ओर से उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी साझा की गई जिसमें पत्रकार बंधुओं का जिला ब्यूरो चीफ साथियों संवाददाताओं को संस्था की ओर से
तीन माह, 6 महीने 1 वर्ष तब का पत्रकारिता व जर्नलिज्म मास कम्युनिकेशन के क्षेत्र में डीजेरटेशन कोर्स कराने का आश्वासन दिया गया तथा 3 वर्ष से अधिक कार्य कर रहे पत्रकारों को मान्यता प्राप्त पत्रकार कराने का भी भरोसा जताया गया
साथ ही साथ समाज हित में पत्रकारिता के महत्व को भी विवरण किया गया संस्था के पदाधिकारियों ने संपूर्ण भारत में बहुआयामी समाचार का नाम प्रकाशित कराने का भी दायित्व जिम्मा सौंपा सभी साथियों ने पूर्ण गहन अध्ययन व मेहनत के साथ जिम्मेवारी के साथ न्यूज़ प्रकाशन का जिम्मा लिया।
इस महत्वपूर्ण बैठक में जनपद वाराणसी से ब्यूरो चीफ मिस प्रियंका पटेल जी जनपद लखीमपुर से ब्यूरो चीफ श्रीमान अकील अहमद जी उप ब्यूरो चीफ जावेद अहमद जी अन्य जनपद लखीमपुर के प्रत्येक ब्लाक के पत्रकार साथी गण भी उपस्थित रहे।

By admin_kamish

बहुआयामी राजनीतिक पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!