बहुआयामवाद

बहुआयामी व्यक्तित्व या बहुआयामवाद को परिभाषित करने से पहले निम्न धारणा पर विशेष ध्यान आकर्षित करते हैं

बहुआयामी शब्द की उत्पत्ति आयामों, विमाओं, दिशाओं, से होती है

उदाहरण के तौर पर यदि बहुआयामी की बात करें तो देखते हैं कि हम तीन दिशाओं में जीवन व्यतीत कर रहे हैं जिसको हम आगे,पीछे आएं, बाएँ, ऊपर, नीचे बोल पाते हैं

उदाहरण के तौर पर यदि किसी कीड़े को एक धागे पर रेंगने के लिए स्वतंत्र कर दिया जाए तो वह एक ही विमा का अनुभव कर सकेगा ठीक इसी प्रकार यदि उसे एक मेज पर बैठा दिया जाए तो वह दो विमाओं का अनुभव करेगा यदि वही कीड़ा उड़ने के लिए स्वतंत्र है तो वह तीन दिशाओं का अनुभव कर सकेगा।

ठीक इसी प्रकार से बहुआयामी शिक्षा बहुआयामी तकनीकी और बहुआयामी अनुसंधान को संज्ञान में लेते हुए बहु आयामवाद की परिभाषा दी जा रही है।

यदि एक बहुआयामी व्यक्तित्व की बात करें तो जो कई पहलुओं पर एक ही समय पर बात रखने और कार्य करने  का हुनर रखता है जो कि किसी अभिरुचि हो या शर्तों के साथ संदर्भित रहता है बहुआयामी व्यक्तित्व में बहुआयामी प्रतिभा, बहुआयामी संघर्ष, बहुआयामी साहस, बहुआयामी क्षमता, बहुआयामी जिज्ञासा, बहुआयामी गतिविधियां, बहुआयामी असीमित व्यक्तित्व, बहुआयामी आध्यात्मिक विकास ,और बहुआयामी व्यक्तिगत विकास, बहुआयामी ज्ञान, और कौशल की सार्वभौमिकता बहुआयामी तर्कसंगत के रूप में निरंतर अथाह सागर आगे बढ़ते रहने का व्यक्तित्व है।

बहुआयामी प्रतिभा को देखते हुए

यह बहुमुखी संभावनाओं की सीमाओं का विस्तार, प्रयासों के आवेदन बिंदु चुनने की स्वतंत्रता, अनुभवों से सीखने की क्षमता, निष्क्रियता और उबाऊ पन से मुक्ति, रचनात्मकता और आत्म अभिव्यक्ति से आनंद, आसपास के पर्यावरण का आवरण, बहुआयामी ज्ञान की बहुमुखी प्रतिभा को प्रदर्शित करता रहता है।

बहुमुखी प्रतिभा के लिए आवश्यक है कि विभिन्न क्षेत्रों, के अपने ज्ञान , कौशल, शैक्षिक स्वाद, अभ्यास, श्रम, व्यवहारिक उपकरण, को लहराते हुए अपने व्यक्तित्व की खेती,उपज करने का प्रयास करता रहता है।

संक्षिप्त में कहा जा सकता है कि ऐसा व्यक्तित्व जिसने अनेक आयाम, अनेक विचार, अनेक स्तर, अनेक कोण, अनेक दिशा, अनेक परिमाण,अनेक धारणाओं, का सटीक मार्गदर्शन हो।

अनंतः प्रत्येक व्यक्ति बहुआयामी व्यक्तित्व का मालिक होता है इसके सकारात्मक नकारात्मक महत्व व पहचान को समझे बगैर समाज या विश्व में शांति लाना असंभव सा लगता है, वैश्विक सामाजिक परिस्थितियों में बदलाव का जिम्मेवार प्रत्येक बहुआयामी व्यक्तित्व ही होता है

उदाहरण के तौर पर यदि मैं ओर आप हम एक बहुआयामी व्यक्तित्व के हैं और मेरी सारी पहचाने बहुआयामी सही दिशाओं में हैं तो मैं और आप हम निश्चित तौर पर विश्व में शांति और विकास की दिशा में बेहतर चमत्कारी बदलाव करने में सक्षम हो सकेंगे।

यदि निरंतर प्रगति करने में गलती से दिशाओं का फेरबदल होता है तो निश्चित तौर पर विश्व पतन की ओर पहुंचने के लिए बाध्य होता रहेगा

(उदाहरण के तौर पर बहुआयामी विज्ञान ने परमाणु बम का आविष्कार करके दिखाया है) और निश्चित तौर पर बहुआयामी व्यक्तित्व नष्ट होता चला जाएगा।

यदि किसी भी कार्य को बिना गलती किए हुए लगातार किया जाए और बिना कठिनाई से किया जाए तो वह बौद्धिक क्षमता का सूचक माना जाता है।

वर्तमान समाज की स्थिति और परिस्थितियों को समझते हुए शिक्षा तकनीकी एवं अनुसंधान में अहम बहुआयामी सोच के साथ बदलाव करने की आवश्यकता है।

जो की बहुआयामवाद बहुआयामी राजनीतिक पार्टी का प्रमुख उद्देश्य रहेगा।

के एम आमिष

By admin_kamish

बहुआयामी राजनीतिक पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!