जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सांसद आदर्श ग्राम पूरे में चौपाल का हुआ आयोजन॥

रोहित सेठ

शासन की जनहितकारी योजनाओं से वंचित पात्र लाभार्थियों को लाभान्वित कराया जाय- एस.राजलिंगम॥

जो भूमिहीन हैं, उन्हें पट्टा बनाकर आवास योजना के साथ शौचालय भी देना सुनिश्चित कराएँ॥

जिनके पास पक्के मकान है, वे लालचवश सरकारी योजना के आवास की माँग न करें, सरकार गरीब लोगों के लिए ऐसी योजनाए चलाती है॥

जिलाधिकारी ने गर्भवती महिलाओं की गोदभराई और नवजात बच्चों को अन्नप्राशन भी कराया॥

सांसद आदर्श गांव पूरे में बारात घर न होने की शिकायत पर जिलाधिकारी ने छः महीने के भीतर बारात घर बनवाने का दिया भरोसा॥

    वाराणसी। जिलाधिकारी एस. राजलिंगम की अध्यक्षता में बुधवार को विकासखंड सेवापुरी के सांसद आदर्श गांव पूरे में चौपाल का आयोजन हुआ। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने गर्भवती महिलाओं की गोदभराई और नवजात बच्चों को अन्नप्राशन भी कराया।
     जिलाधिकारी ने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से पात्र लाभार्थियों को संतृप्त कराने के लिए दूसरी बार चौपाल लगाया गया है। जिसका उद्देश्य है कि छूटे लाभार्थियों का क्रॉस चेकिंग कराकर उन्हें शासन की योजनाओं से लाभान्वित करना है। उन्होंने एक-एक कर शिकायतें सुनी और उसे संबंधित विभाग के अधिकारियों को शीघ्र समाधान करने हेतु निर्देशित किया। चौपाल में शासन की मुख्य योजनाओं में प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना, हर घर नल जल योजना, शौचालय, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, वृद्धा, विधवा और विकलांग पेंशन योजना सहित ग्राम पंचायत की वर्तमान समस्याओं पर चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने मौके पर मौजूद अधिकारियो को छूटे पात्र लाभार्थियों के संबंध में शासन स्तर पर अवगत कराकर उन्हें योजनाओं से लाभान्वित करने हेतु निर्देशित किया गया।
     प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना की समीक्षा के दौरान परियोजना निदेशक द्वारा बताया गया कि 108 पात्र लाभार्थियों को आवास योजना का लाभ दिया गया है तथा 70 और लाभार्थियों की सूची बनाई गई है। फिर भी कुछ और लोगों द्वारा आवास योजना से वंचित रहने की शिकायत पर की गई, इस पर जिलाधिकारी ने ग्राम पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान से अन्य पात्र लोगों को वेरिफाई कर योजना से लाभान्वित कराने हेतु निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि जो भूमिहीन हैं, उन्हें पट्टा बनाकर आवास योजना के साथ शौचालय भी देना सुनिश्चित कराएँ। उन्होंने लोगों से कहा कि जिनके पास पक्के मकान है, वे लालचवश घर की माँग न करें। सरकार गरीब लोगों के लिए ऐसी योजनाए चलाती है। हर घर नल जल योजना में पाइप लिकेज की समस्या पर जिलाधिकारी ने जल निगम के अधिशासी को एस्टिमेट बनाकर प्रस्तुत करने और पाईपो की रेट्रोफ़िटिंग का काम शुरू कराने का निर्देश दिया। एक महिला के द्वारा गाँव में बारात घर न होने की शिकायत पर जिलाधिकारी ने छः महीने के भीतर बारात घर बनवाने का भरोसा लोगों को दिया। इसी प्रकार उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, पेंशन आदि योजनाओं के छूटे लाभार्थियों की शिकायतें सुनकर संबंधित विभाग के अधिकारियों को लाभान्वित करने हेतु निर्देशित किया गया। इसके अलावा जिलाधिकारी के समक्ष जलभराव,राजस्व विवाद,सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण, आदि की शिकायतों का संबंधित विभाग के अधिकारियों को निस्तारित कराने का निर्देश दिया।मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु नगपाल ने बताया कि इस ग्राम पंचायत में नालीयाँ, गलियाँ, पार्क, सोलर लाइट, सीसीटीवी कैमरा, पैसेंजर शेड, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए वर्किंग शेड, डस्टबीन, एक लाइब्रेरी सहित अन्य विकास कार्यों से संबंधित विभिन्न निर्माण कार्यों की स्वीकृति मिली है, जिसे शीघ्र ही शुरू करा दिया जायेगा। इस दौरान पर्यावरण का संदेश देते हुए जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी ने सचिवालय परिसर में बरगद और पाकड़ के पौध का रोपण किया।
   इस कार्यक्रम में परियोजना निदेशक, बीडीओ, डीपीआरओ, लेखपाल, सचिव सहित अन्य आधिकारी और ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!