मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों ने बयां किया अपना दुख दर्द और मांगा बकाया मानदेय,

मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक संघ बिजनौर का सम्मान समारोह धामपुर में संपन्न

रिपोर्ट आसिफ रईस धामपुर (बिजनौर )

धामपुर नगर में आज मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक संघ बिजनौर की ओर से एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें मुफ्ती शमून कासमी, सदस्य- प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड केंद्रीय मदरसा आधुनिकीकरण योजना (अल्पसंख्यक मंत्रालय भारत सरकार ) ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और आधुनिकीकरण शिक्षकों की समस्याओं को सुनकर उनके समाधान का आश्वासन दिया। इस अवसर पर मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष कमरुद्दीन, हज़रत मौलाना मुफ्ती क़मर साहब, अज़ीमुल्ला फरीदी, एडवोकेट अबरार अहमद, तनवीर अहमद, शाहिद हुसैन, इरशाद अली,अफजाल अहमद, मोहम्मद वारिस, नसरीन अंजुम, कायनात ज़ैदी सहित जनपद के अनेक शहरों, तहसील और कस्बों के मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों ने भाग लिया जिसमें महिला शिक्षक भी बड़ी संख्या में मौजूद रहीं। मुख्य अतिथि का सभी ने भव्य स्वागत किया, प्रशस्ति पत्र और शाल उढ़ा कर सम्मानित किया। साथ ही मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों की समस्याओं से भरा एक ज्ञापन पत्र भी उनको इस आशय के साथ सौंपा गया कि वह उन समस्याओं का अवश्य समाधान कराएंगे जिससे वर्षों से मदरसा शिक्षक दो-चार हो रहे हैं और उनके परिवार प्रभावित हो रहे हैं।

मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष कमरुद्दीन ने बताया की मदरसों के शिक्षक लगातार मेहनत कर रहे हैं और अध्यापन का कार्य कर रहे हैं लेकिन सरकार उनका मानदेय नहीं दे रही है। पिछले 4 साल का बकाया मानदेय है फिर भी टीचर अपना काम बखूबी कर रहे हैं, इस आशा के साथ कि आज नहीं तो कल कुछ अच्छा होगा और उनका मानदेय मिलेगा । इसी उम्मीद पर मदरसा आधुनिक टीचर बैठे हुए हैं और अपना काम कर रहे हैं
आज मुख्य अतिथि मुफ्ती शमून कासमी के सम्मान समारोह में भी शिक्षकों ने अपनी अनेकों समस्याओं को रखा।
स्योहारा के अनवार अहमद नूर ने मदरसा अध्यापकों के शोषण, उनको मानदेय न मिलने, परीक्षा कक्ष की ड्यूटी के पैसे न दिए जाने और अल्पसंख्यक विभाग कार्यालय में शिक्षकों का लगातार शोषण किए जाने, बार बार कागज़ों को जमा कराने के नाम पर भ्रष्टाचार होने का मुद्दा उठाते हुए शिक्षकों की बेहाली को उजागर किया।
मुख्य अतिथि मुफ्ती शमून कासमी ने कहा कि वह मदरसा के आधुनिकीकरण शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए हर संभव प्रयास करेंगे उन्होंने बताया की शिक्षकों को अपना कार्य निस्वार्थ भाव से करते रहना चाहिए वर्तमान केंद्रीय मोदी सरकार और यूपी की योगी सरकार की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि इस शासनकाल में अल्पसंख्यकों के साथ कोई भेदभाव नहीं है सरकारी योजनाएं और उनका लाभ सभी को समान रूप से उपलब्ध कराया जाता है। महिलाओं की भी उन्होंने काफ़ी तारीफ करते हुए उनको घर परिवार और राष्ट्र को बनाने संवारने की अनेक नसीहतें दी, साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि वह मदरसे के आधुनिकीकरण शिक्षकों की समस्याओं और उनके मानदेय और ड्यूटी के पैसे वगैरह न मिलने के मामलों को अपने उच्च पदाधिकारियों और माननीय मंत्री महोदय तक अवश्य पहुंचाएंगे और निष्पक्ष रुप से जितना भी उनसे हो सकता है वह मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों की समस्याओं को सुलझाने में अपना सहयोग प्रदान करेंगे।

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!