श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन कृष्ण एवं राम जन्मोत्सव में झूमे श्रद्धालु।

शिवपुर। नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की।

रोहित सेठ

वाराणसी भजन की लय पर एक साथ हजारों श्रद्धालु झूम उठे l अवसर था फलाहारी बाबा आश्रम में छल रहा महालक्ष्मी महायज्ञ परिक्रमा कर सुख समृद्धि का कामनाएं कर रहे। वहीं शाम को शिवपुर रामलीला मैदान प्रांगण परिसर में चल रही भागवत कथा की पांचवें दिन श्री कृष्ण जन्म उत्सव का बाल विदुषी शिवांगी किशोरी ने श्री कृष्ण का प्रसंग सुनाया। श्री कृष्ण रूपी नन्हे बालक को पंडाल में लाएं तो पुष्प वर्षा से स्वागत हुआ गुरुवार को पंडाल में हजारों श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए मौजूद थे।

शिवांगी किशोरी जी ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा कि अखंड कोटि ब्रह्मांड नायक करुणा वरुणालय भगवान श्री कृष्ण के जन्म के समय परम शोभन कॉल स्वयं मूर्तिमान होकर उनका स्वागत करने आ गया उसने भगवान के जन्म काल के सभी गुण प्रकट कर दिए। सर्वत्र बड़े ही सुंदर दृश्य दिखाई पड़ने लगे। रोहिणी नक्षत्र ने आकर सभी वस्तुओं में अलौकिकता उत्पन्न कर दी। ग्रह नक्षत्र तारा सभी शत्रु भाव से लग्नेश को देखने लगे दिशाओं ने वर्षा में शरद गुण प्रकट कर दिए आकाश मेघो से आछादित हो गया जिसमें रह-रह कर तारागण भगवान की झांकी के लिए मचलते थे पृथ्वी की प्रसन्नता का तो कहना ही क्या था नगर और ग्रामों में सजावटी होने लगी नाना प्रकार के मंगल गीत गाए जाने लगे ब्रज में गौओं के थन से दूध अपने आप टपकने लगा जान पड़ता था कि पृथ्वी ही गौ बनकर दुग्ध धारा से भगवान श्री कृष्ण का अभिषेक कर रही है आकाश से देवता फूल बरसाने लगे ऐसे शुभ समय में माता देवकी गर्भ से भगवान प्रकट हो गए।

श्रीमद्भागवत कथा का महत्व बताते हुए प्रभु राम व कृष्ण जन्म की कथा सुनाई। कहा कि कलयुग में भागवत की कथा सुनने से जीव को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही जन्म जन्मांतर के पापों का अंत भी होता है। कृष्ण व श्री राम जन्मोत्सव का वर्णन सुन दर्शक भाव विभोर हो गए।
कथा वाचल देवव्रत महराज ने कहा कि जब पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ने लगा तब गौ माता भगवान ब्रह्मा के पास पहुंची और उसका निवारण करने की बात कहने लगी। तब भगवान ब्रह्मा ने गौ माता से कहा कि सृष्टि के सभी लोगों को प्रभु का ध्यान करना चाहिए तब जाकर इस समस्या का समाधान होगा। गजेंद्र मोक्ष राम जन्म व कृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि तालाब में स्नान करने गए गजेंद्र का पैर घड़ियाल ने पकड़ लिया था जिसकी पीड़ा से गजेंद्र परेशान थे और उन्होंने भगवान का स्मरण किया जिसके बाद भगवान नारायण पहुंचकर गजेंद्र को मुक्त कराया। इसके बाद अयोध्या में जन्मे भगवान श्री राम की कथा सुनाई। राजा दशरथ महारानी कौशल्या के घर जन्म हुआ भगवान श्री राम ने मर्यादा स्थापित कर मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाया है। बंदी गृह में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ जिसके बाद बसु देव जी ने बालक को लेकर गोकुलधाम नंद बाबा यशोदा के पास छोड़ आए और वहां कृष्ण जन्म का उत्सव मनाया गया। इस दौरान सभी भक्तों ने भागवत की आरती उतारी और प्रसाद का वितरण किया गया।
मुख्य यजमान विनोद कुमार दूबे, मंहत रामदास त्यागी, प्रचार मंत्री कमलेश केशरी,कोषाध्यक्ष आंनद अग्रवाल पवन गुप्ता, डा.अजय मिश्रा, महंतश्री रामकरण दास मौजूद रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *