मानव अधिकार एवं सामाजिक न्याय पर राष्ट्रीय सम्मेलन विश्व मानवाधिकार दिवस।

रोहित सेठ

वाराणसी, आज विश्व मानवाधिकार दिवस 2024 के विश्वव्यापी पालन के हिस्से के रूप में प्रोग्रेसिव फाउंडेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स (पीएफएचआर), गांधीनगर, गुजरात 10 दिसंबर, 2024 को होटल द रमाड़ा कटेसर, रामनगर रोड वाराणसी मे मानव अधिकार एवं सामाजिक न्याय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। जिसमें देश की जानी मानी हस्तियां और 27 राज्यों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। यह राष्ट्रीय सम्मेलन प्रोग्रेसिव फाउंडेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ‌द्वारा पिछले 18 वर्षों से आयोजित किया जा रहा है।

10 दिसंबर 2024 को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक प्रतिमाओं में से एकः मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा की 76वीं वर्षगांठ है। यह ऐतिहासिक दस्तावेज़ उन अविभाज्य अधिकारों को सुनिश्चित करता है जो हर किसी को एक इंसान के रूप में प्राप्त हैं चाहे वह किसी भी जाति, रंग, धर्म, लिंग, भाषा, राजनीतिक या अन्य राय, राष्ट्रीय या सामाजिक मूल, संपत्ति, जन्म या अन्य स्थिति का हो। यह घोषणा 10 दिसंबर 1948 को पेरिस में संयुक्त राष्ट्र महासभा ‌द्वारा घोषित की गई थी।

इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता दयाशंकर मिश्र दयालु (आयुष मंत्री स्वतंत्र प्रभार उत्तर प्रदेश सरकार), श्री रवीन्द्र जयसवाल (स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार), अशोक तिवारी (मेवर वाराणसी), श्री राजू परमार (पूर्व सांसद राज्यसभा, गुजरात), नरेश रावल । पूर्व गृह मंत्री, गुजरात सरकार), मुकेश पांडे (फिल्म निर्माता), रोहित पांडे (पूर्व सचिव सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन), डॉ रति शंकर त्रिपाठी , (अध्यक्ष भारतेंदु नाट्य अकादमी, उत्तर प्रदेश) होंगे। महंत विश्वंभर नाथ मिश्र (संकट मोचन मंदिर, काशी), विश्व भूषण मिश्र (काशी विश्वनाथ मंदिर, काशी के
सीईओ), बंसीधर उपाध्याय ( प्रसिद्ध समाज सुधारक, वाराणसी), ए. जय उपाध्याय (भाजपा राकेश कुमार पांडे (वकील, सेंट्रल बार एसोसिएशन, वाराणसी के पूर्व अध्यक्ष ब्रिजेश कुमार मिश्र, होम गाईस के जिला कमांडेंट, वाराणसी और अन्य लोग भाग लेंगे। इस समारोह में वाराणसी का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। इसके अलावा, वाराणसी, जिसे काशी भी कहा जाता है, पवित्र शहर है, जो दुनिया के सबसे पुराने जीवित शहरों में से एक है। इतिहास से भी पुराना, परंपरा से भी पुराना, किंवदंतियों से भी पुराना और इन सभी को मिलाकर भी यह दोगुना पुराना लगता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोग्रेसिव फाउंडेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स के अध्यक्ष और अभिनेता श्री राकेश पांडे करेंगे। कार्यक्रम का संचालन भारत गौरव डॉ अनीता सहगल वसुंधरा (राष्ट्रीय एंकर और प्रसिद्ध लेखिका) करेंगी। पीएफएचआर नीति आयोग और कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार के साथ पंजीकृत है और इसने 2006 में अपनी स्थापना के बाद से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बड़े पैमाने पर समाज से संबंधित सभी अवसरों पर कई सेमिनार, सम्मेलन और सम्मेलन आयोजित किए हैं।

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!