
रामानंद सागर ब्यूरो चीफ बाराबंकी एम डी न्यूज़
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के बहुचर्चित माती पुलिस चौकी आगजनी और पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमले के मामले में करीब 11 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या-02 राकेश कुमार सिंह प्रथम की अदालत ने सोमवार को इस मामले में दोषी करार दिए गए सभी 22 आरोपियों को 7-7 साल के कारावास की सजा व सभी को ₹20,500/- जुर्माना भुगतने की सज़ा सुनाई है।
शनिवार को अदालत ने सभी आरोपियों को दोष सिद्ध करार दिया था, जिसके बाद सोमवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया गया। अदालत के इस निर्णय को कानून व्यवस्था और पुलिस पर हमलों के मामलों में एक महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।यह पूरा मामला वर्ष 2015 में देवा थाना क्षेत्र की माती पुलिस चौकी में हुई हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी से जुड़ा है। उस समय इस घटना ने पूरे बाराबंकी समेत प्रदेश की कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया था।शासकीय अधिवक्ता अरविंद राजपूत के अनुसार, 30 अगस्त 2015 को देवा थाने की हवालात में बंद अभियुक्त सुभाष राजवंशी द्वारा आत्महत्या किए जाने के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया था। आरोप है कि कुछ लोगों ने इस घटना को राजनीतिक रंग देकर भीड़ को भड़काया।
इसके अगले दिन 31 अगस्त 2015 को भारी संख्या में लोग माती पुलिस चौकी पहुंच गए। उस समय चौकी पर आरक्षी राजेंद्र सिंह बिष्ट अपने साथी पुलिसकर्मियों प्रदीप सिंह, रणजीत सिंह, पारस नाथ मिश्रा और अशोक यादव के साथ ड्यूटी पर मौजूद थे।पुलिस की तहरीर के अनुसार, भीड़ लाठी-डंडे, सरिया और डीजल-पेट्रोल से भरी पिपियां लेकर चौकी पहुंची थी। आरोप है कि भीड़ में शामिल लोगों ने पुलिस चौकी को चारों तरफ से घेर लिया और पुलिसकर्मियों को जिंदा जलाने की मंशा से हमला कर दिया।
हमलावरों ने चौकी परिसर में तोड़फोड़ करते हुए सरकारी दस्तावेज, अभिलेख, वायरलेस सेट और पुलिसकर्मियों के निजी सामान को नुकसान पहुंचाया। चौकी भवन के सामने बने छप्पर में आग लगा दी गई, जिससे पूरी चौकी आग की चपेट में आ गई।इस दौरान पुलिसकर्मियों की मोटरसाइकिलें भी जला दी गईं। आरक्षी प्रदीप सिंह इस हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे, जबकि अन्य पुलिसकर्मियों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई थी।मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत में पेश साक्ष्यों के अनुसार, आरोपियों ने चौकी का वायरलेस सेट तोड़कर पुलिस की संचार व्यवस्था बाधित कर दी थी ताकि समय पर अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर न पहुंच सके।
इतना ही नहीं, भीड़ ने चौकी के शस्त्रागार का दरवाजा तोड़कर हथियार लूटने की भी कोशिश की थी। पुलिस के विरोध करने पर उन पर लाठी-डंडों और सरियों से हमला किया गया था
ब्यूरो चीफ रामानंद सागर
