
आज का दिन संकल्प और आत्मावलोकन का दिन है– कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा।
रोहित सेठ





वाराणसी भारत ज्ञान की भूमि रही है, इस ज्ञान का सबसे सशक्त माध्यम देववाणी संस्कृत में अंतर्निहित है संस्कृत भाषा एकता के सूत्र की भाषा है।इस भाषा के संरक्षण संवर्धन के लिए यह विश्वविद्यालय अति प्राचीन है। यह संस्था उच्च शिक्षा,भारतीय ज्ञान परंपरा और उत्कृष्ट शोध के लिए स्थापित है इसे मजबूती से आगे बढ़ना चाहिए। सम्पूर्ण देश में जितने प्राचीन भाषा के संस्था हैं वह इसी विश्वविद्यालय से जोड़ना चाहिए।. इसके लिए सभी लोग संकल्पित भाव से मिलजुलकर कर इस भाव साधना को पूर्ण करने की जरूरत है। इस संस्था के लिये सदैव सहयोग का प्रयास किया जाएगा.
उक्त विचार सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने ऐतिहासिक मुख्य भवन के समक्ष 76 वें गणतंत्र दिवस समारोह के अंतर्गत बतौर मुखिया व्यक्त किया।
गणतन्त्र दिवस पर सेल्युलर जेल पर आधारित प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि छायाचित्र ही इतिहास के साक्ष्य हैं और इससे महान स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानकारी प्राप्त होती है।
कुलसचिव राकेश कुमार, प्रो रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो रामपूजन पाण्डेय,प्रो रजनीश कुमार शुक्ल, प्रो सुधाकर मिश्र, प्रो हरिशंकर पाण्डेय,प्रो अमित कुमार शुक्ल,डॉ पद्माकर मिश्र, प्रो हरिप्रसाद अधिकारी, प्रो जितेन्द्र कुमार, प्रो राजनाथ,प्रो शैलेश कुमार मिश्र,प्रो रमेश प्रसाद, प्रो राजनाथ, प्रो विजय कुमार पाण्डेय, प्रो दिनेश कुमार गर्ग,प्रो विद्या कुमारी डॉ विशाखा शुक्ला सहित संस्था के अन्य अध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी एवं विद्यार्थियों ने सहभाग किया।
