बदायूँ।सहसवान रेंज के मालपुर तातैरा वन खण्ड में गैर कानूनी कटाई हो रही है जिससे प्राकृतिक संपदा को बड़ी हानि हो रही है जंगली जीवों का रैन बसेरा भी खत्म हो रहा है। । वहीं सरकार को भी चूना लगा क्योंकि करोड़ के खैर के पेड़ गायब हो गए हैं। बेलदार से लेकर उच्च अधिकारी तक की इसमें मिली भगत है। कुछ बेलदार कटे हुए पेड़ों को भी छुपा रहे हैं। जबकि वन विभाग कर्मचारी अनिल राजपूत का फर्ज है जंगल को बचाना लेकिन वहीं ठेकेदारों के साथ मिले हुए हैं। अफसरशाही कि शह पर कानून UP -1980 की धारा 4/5 की भी बड़े स्तर पर उल्लंघना हो रही है। पिछले कई सालों से सहसवान रेंज मालपुर तातैरा वन खंड में पेड़ काटने का सिलसिला जारी था। जानकारी देते हुए बताया कि काफी लंबे समय से यह काम हो रहा है, परंतु विभाग के बेलदार से लेकर उच्च अधिकारी तक इसमें शामिल होने के कारण कार्रवाई नहीं होती है।

काटने वाले जितने पेड़ों पर नंबर लगे होते हैं उससे कई ज्यादा पेड़ काट कर ले जाते हैं। इसके बदले वन विभाग को कई मोटी रकम दे दी जाती है, जिसके कारण इस तरफ कोई ध्यान नहीं देता। मालपुर तातैरा के ग्रामीणों ने बताया की खैर की लकड़ी 14000 रुपए प्रति कुंतल के हिसाब से बेची जाती है, कुछ ग्रामीणों ने कुछ ऐसे पेड़ दिखाएं जिनके ऊपर वन विभाग की तरफ से कोई भी नंबर लगाया नहीं गया था। परंतु इस समय बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार के सबूत सामने आए, जिसमें हजारों पेड़ कट गए परंतु उन्हें मिट्टी और घास बहुत से छुपा दिया गया। कुछ तस्वीरें ऐसी सामने आए जिनके ऊपर बंद विभाग की तरफ से नंबर नहीं लगाई गई। वन विभाग इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है बल्कि जो इनकी आंखें खोलने के लिए बात करता है उसको चुप करने के लिए पूरा जोर लगाया जा रहा है। कुछ लोगों ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि जमीन से 4 इंच से अधिक ऊपर पेड़ की कटाई की जाती है जबकि यह खेर के पेड़ जमीन के बिल्कुल साथ से ही कटे हुए हैं 3-4 सेंटीमीटर मोटी से ऊपर के पेड़ों की कटाई और बोली होती है। मालपुर तातैरा बन खंड में हर साल लाखों पेड़ों की संख्या रोपण की जाती है लेकिन आज तक एक भी पेड़ जीवित नहीं है। जंगल की पूरी जानकारी न्यूज़ के द्वारा DFO को भी प्राप्त हुई होगी परंतु कोई कार्रवाई नहीं हो रही है ……..। वन विभाग के उच्च अधिकारी सरकार को चपत लगा रहे हैं।

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