अगर पिछले 20 वर्षों में कानपुर के नेताओं, मेयर और नगर निगम के अधिकारियों द्वारा हर साल सिर्फ एक समस्या को जड़ से खत्म करने का संकल्प लिया, लेकिन समाप्त नहीं कर पा रहे हैं आज भी।वरना आज सच में हमारा शहर स्मार्ट सिटी होता।लेकिन ऐसा नहीं हुआ…हर साल की तरह विभाग में सिर्फ चोर बाजारी और गड़बड़ झाले चले हैं:▪️ नाला सफाई भी आधी अधूरी▪️ शहर का कचरा उठाने में भी जल्दबाजी कर आधा अधूरा कार्य रहा, बल्कि ले जाते समय भी गाड़ियों से बाहर निकलता रहा है कूड़ा,▪️ रोड लाइट और बस्तियों की स्ट्रीट लाइट में भी हो रहे हैं झोल▪️ इंटरलॉकिंग टाइल एक कार्यकाल में बिछाई गई तो दूसरे कार्यकाल में उसी जगह फिर से बिछाने का झोल,की गई खानापूर्ति, पूर्व की तरह ही सीवर लाइने मानक विहीन डाली गई,▪️ सिर्फ़ अतिक्रमण हटाने का चल रहा ड्रामामूलभूत सुविधाओं की नहीं है कोई चिंता ।न सड़कों की सुध, न जलनिकासी का हल, न ट्रैफिक का समाधान।घंटाघर से लेकर इस्पात नगर तक बदलते हालात *स्मार्ट सिटी’ केवल बोर्ड पर बल्कि ज़मीन पर दिखनी चाहिए थी*।

