रिपोर्ट मनुरुद्ध सिंह
बहुआयामी समाचार कस्ता

बनिया खेड़ा , 6 जुलाई 2025: चंदौसी तहसील की बनिया खेड़ा ग्राम सभा में मोहर्रम की दसवीं तारीख को ताजियों को करबला में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। नगर में विभिन्न क्षेत्रों से निकाले गए जुलूस में हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातम करते चल रहे थे। ‘अली का दामन नहीं छोड़ेंगे, हुसैन का दामन नहीं छोड़ेंगे’ नारे लगाए जा रहे थे। विभिन्न क्षेत्रों से ताजियेदारों, अलमदारों के आने का क्रम शुरू हुआ। इसमें हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद किया।


इस्लामी धर्म में मोहर्रम को अत्यंत पवित्रता और सम्माननीय महीनों में गिना जाता है। यह हिजरी (इस्लामी) कैलेंडर का पहला महीना होता है, जिससे इस्लामी नववर्ष की शुरुआत होती है। यह महीना खासकर शिया मुस्लिम समुदाय के लिए बेहद भावनात्मक और आस्था से जुड़ा होता है, क्योंकि इस महीने की 10वीं तारीख (यानी आशूरा) को इस्लाम के तीसरे इमाम, हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके 72 साथियों ने कर्बला (मौजूदा इराक में) शहीदी दी थी।


61 हिजरी को, कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन ने अत्याचारी शासक यज़ीद के खिलाफ अन्याय और भ्रष्ट शासन के विरुद्ध आवाज़ उठाई। वे अपने परिवार और साथियों के साथ सत्य और धर्म की रक्षा के लिए खड़े हुए और भूख-प्यास की हालत में भी सिर नहीं झुकाया।
10 मोहर्रम यानी आशूरा के दिन, इमाम हुसैन और उनके परिवार के सदस्यों को शहीद कर दिया गया। यह घटना इस्लाम में न्याय, बलिदान और सच्चाई की सबसे बड़ी मिसाल मानी जाती है।
1 मोहर्रम से ही इमाम हुसैन की यात्रा और कर्बला की ओर उनके काफ़िले की तैयारी की यादें ताज़ा की जाती हैं।
इन दस दिनों में मुस्लिम समाज, विशेषकर शिया मुसलमान, ग़म और मातम के साथ हुसैन की कुर्बानी को याद करते हैं।
हर दिन अलग-अलग घटनाएं याद की जाती हैं, जैसे – पानी की बंदिश, मासूम अली असगर की शहादत, जनाबे अली अकबर की बहादुरी, और अंत में इमाम हुसैन की शहादत।
श्रद्धा और प्रतीक ताजिया एक प्रतीकात्मक रूप होता है जो हजरत इमाम हुसैन के रौज़े (मकबरे) का मॉडल होता है। इसे लकड़ी, थर्माकोल, कागज और सजावटी वस्तुओं से बनाया जाता है।
मोहर्रम केवल ग़म का महीना नहीं, यह अन्याय के खिलाफ लड़ने, सच्चाई के रास्ते पर अडिग रहने और कुर्बानी देने की प्रेरणा का प्रतीक है। इमाम हुसैन का पैग़ाम है। मोहर्रम का शांति पूर्वक बनिया खेड़ा शांति से मनाया गया मोहर्रम मातम के साथ याद किए गए इमाम हुसैन

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