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उतरौला में करबला के शहीदो की याद में बड़ा इमामबाड़ा आबिदा बेगम में आयोजित की गई मजलिस और शब्बेदारी

मदीने में जहां पर रोते थे इमाम हुसैन के बेटे, उसी मिट्टी की कराई गई जियारत

सिद्धार्थनगर। मोहर्रम महीने का गम जो इमाम हुसैन (अ.स.) की शहादत और करबला की दुखद घटनाओं की याद में मनाया जाता है, इस पवित्र अवसर पर उतरौला के सुभाष नगर मोहल्ले में स्थित बड़ा इमामबाड़ा आबिदा बेगम में 21 जुलाई, यानी 25 मोहर्रम को रात 8:30 बजे गहरी श्रद्धा के साथ शब्बेदारी आयोजित की गई। इस वार्षिक आयोजन, जिसे “शब-ए-दारी” के नाम से जाना जाता है जिसमें बीमार-ए-करबला की शबीह-ए-ताबूत की पारंपरिक शोभायात्रा निकाली गयो, जो इमाम ज़ैनुल आबिदीन (अ.स.) की पीड़ा का प्रतीक है, जिन्होंने करबला की जंग के बाद असीम कष्ट सहे। इस आयोजन का प्रबंधन सफ़ीर-ए-अज़ा अमीर हसन आमिर द्वारा किया जा रहा है, जो हर साल इस कार्यक्रम को भव्यता और श्रद्धा के साथ आयोजित करते हैं।

मोहर्रम, इस्लामी चंद्र कैलेंडर का पहला महीना, विश्व भर के मुसलमानों, विशेष रूप से शिया समुदाय के लिए गहरा महत्व रखता है। यह इमाम हुसैन (अ.स.), पैगंबर मुहम्मद (स.अ.व.) के नवासे, की 680 ईस्वी में करबला के मैदान में शहादत की याद दिलाता है। करबला की जंग में इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों को यज़ीद की अत्याचारी सेना ने शहीद कर दिया.. इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों ने यजीद के खिलाफ न्याय, सत्य और अत्याचार के विरुद्ध प्रतिरोध के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। यह घटना इस्लामी इतिहास की आधारशिला है, जो साहस, बलिदान और अटूट विश्वास का प्रतीक है।)

बड़ा इमामबाड़ा आबिदा बेगम में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन अनीस जै़सी किया। पेशख़ानी फ़रहान बनारसी, जनाब मुनव्वर जलालपुरी और मशहद जलालपुरी की । मजलिस को मौलाना मिर्ज़ा यासूब अब्बास क़िब्ला ने संबोधित करते हुए करबला की घटनाओं और उनके आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

मजलिस के बाद शबीह-ए-ताबूत बीमार-ए-करबला बरामद किया गया, जिसकी ज़ियारत के बाद विभिन्न अंजुमनों की शिरकत होगी। इसमें अंजुमन अब्बासिया सुरौली सुल्तानपुर, अंजुमन हैदरी हल्लौर, अंजुमन मासूमिया जलालपुर, अंजुमन पैग़ाम-ए-हुसैनी अहलेसुन्नत हलधर मऊ गोंडा और अंजुमन हुसैनिया अमया देवरिया उतरौला के मातमी दस्ते ने नौहां-मातम किया।

आकर्षण का केंद्र रहे नौहां खां राजू पाण्डेय और ॠषि पाण्डेय

सिद्धार्थनगर। उतरौला मे अंजुमन सफीरे अजा अमीर हसन आमिर की ओर से आयोजित शब-ए-दारी में विशेष नौहा-ख़्वानी के लिए राजू पांडे और ऋषि पांडे गाज़ीपुर, ज़हीर अब्बास साहब बॉम्बे और रेहान जलालपुरी शामिल होंकर अपनी मार्मिक प्रस्तुतियों से माहौल को और भी भावपूर्ण बना दिया।

कार्यक्रम के समापन पर उस पवित्र स्थान की ख़ाक की ज़ियारत कराई गई, जहाँ इमाम-ए-सज्जाद (अ.स.) ने 34 साल तक आँसू बहाए। यह आयोजन हुसैनी अज़ादार प्रोडक्शन पर लाइव प्रसारित किया गया, ताकि अधिक से अधिक लोग इस पवित्र समारोह का हिस्सा बन सकें।

जताया आभार

सिद्धार्थनगर। कार्यक्रम आयोजक सफ़ीर-ए-अज़ा अमीर हसन आमिर ने सभी मोमिनीन से समय की पाबंदी के साथ इस आयोजन में शामिल होने के लिए अकीदतमंदो शिया श्रद्धालुओ) के प्रति आभार जताया।। यह कार्यक्रम मरहूम इंजीनियर सैयद आफ़ताब हुसैन रिज़वी की याद में आयोजित किया जा रहा है, जिनके योगदान को हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाता रहेगा।

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