ब्रेकिंग न्यूज़ संवाद,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,*विश्व हेपेटाइटिस के अवसर पर सदर अस्पताल ने दी रामपुर को नई सौगात!* रामपुर से रफीउल्लाह खान की स्पेशल रिपोर्ट सहायक ब्यूरो चीफ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,*मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ डी के वर्मा के हाथों किया गया उद्घाटन**सददाम हुसैन पत्रकार*रामपुर:आज विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर सदर अस्पताल रामपुर ने एक नई सौगात रामपुर वासियों को दी है। इस सौगात से जहां आम लोगों को राहत मिलेगी वहीं रामपुर के गरीबों को भी फायदा होगा।रामपुर में विश्व हेपेटाइटिस बी और सी के मरीजों की काफी संख्या है।याद रहना चाहिए पहले मरीज को हेपेटाइटिस के इलाज के लिए मेरठ जाना पड़ता था और उन्हें कई दिनों का इंतजार करना पड़ता था।ऐसे में मरीजों के सैंपल या तो सूख जाते थे या बदल जाते थे अथवा दूरी के कारण पहुंचने में देर भी लगती थी तो वह खराब भी हो जाते थे। इसमें मरीज़ों का काफी पैसा भी बर्बाद होता था।इस तरह मरीज़ों को अपना इलाज कराने में एक से दो महीने तक लग जाते थे। प्राइवेट में इसका इलाज काफी महंगा होने की वजह से लोगों को बहुत परेशानियों का सामना था। सदर अस्पताल रामपुर के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक श्री डॉक्टर देवेंद्र कुमार वर्मा जहां सदर अस्पताल रामपुर के लिए बेहतर कार्य कर रहे हैं।वहीं उन्होंने आज विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर रामपुर वासियों को एक नई सौगात देकर उनका दिल जीत लिया है।अब मरीजों को ना दूर जाना पड़ेगा और ना ही परेशानियां झेलने होंगी। सदर अस्पताल में ही हेपेटाइटिस बी ओर सी का ट्रीटमेंट आसानी के साथ हो जाएगा।सदर अस्पताल रामपुर में चीफ मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉक्टर डी के वर्मा ने हेपेटाइटिस की आर एन ए मशीन का उद्घाटन किया।मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ डी के वर्मा ने बताया कि आज विश्व हेपेटाइटिस दिवस है जो हर साल 28 जुलाई को मनाया जाता है।इस दिन को हम डॉ. बारूक ब्लमबर्ग के जन्मदिन के सम्मान में मनाते है, जिन्होंने 1967 में हेपेटाइटिस बी वायरस की खोज की थी और इसके लिए नोबेल पुरस्कार जीता था. इस दिन का उद्देश्य वायरल हेपेटाइटिस के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाना है,जिसमें हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई शामिल हैं.इसी लिए हमने आज से सदर अस्पताल में ऐसे मरीज जिन्हें हेपेटाइटिस बी और सी की परेशानी है उनकी जांच शुरू कर दी है।उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में अगर व्यक्ति को हेपेटाइटिस बी या सी आता है तो उसका इलाज सदर अस्पताल में होगा। सदर अस्पताल में हेपेटाइटिस की जांच को लेकर हर तरह की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। सदर अस्पताल रामपुर में जो मशीन लाई गई है उसकी सबसे अहम खासियत यही है कि इस मशीन में एक साथ 24 घंटे में 24 मरीजों की जांच का करके 24 घंटे में उसे जांच उपलब्ध करा दी जाएगी। सदर अस्पताल में आज से पैथोलॉजी में 24 घंटे हेपेटाइटिस बी और सी की जांच का सैंपल लिया जाएगा।अस्पताल का हर डॉक्टर यह जांच लिख सकता है। उन्होंने बताया कि पहले यह जांच कुछ डॉक्टर के द्वारा ही लिखी जाती थी मगर अब ऐसा नहीं है। उन्होंने बताया कि जो दवाइयां ₹50000 की कीमत में प्राइवेट में मिलती थी वह सब अब अस्पताल में मुफ्त मिलेंगी।चीफ मेडिकल सुपरीटेंडेंट के अनुसार अगर किसी मैरिज में हेपेटाइटिस आता है तो उसे दो डब्बे दवा के दिए जाते हैं जिस की एक-एक गोली रात को खाई जाती है।तीन माह के इस कोर्स के बाद भी मरीज के लिए जरूरी है कि वह अपनी 6 महीने में हेपेटाइटिस की जांच जरूर करा लें।बताया कि अगर किसी मरीज में हेपेटाइटिस सी का वायरस है तो वह जल्दी एक्टिव हो जाता है और इसकी खास बात ही है कि यह जल्दी ठीक भी हो जाता है। इसलिए जांच करना अनिवार्य है और अगर किसी मरीज में हेपेटाइटिस बी पाया जाता है तो वह सही होने में वक्त लेता है और एक परसेंट से भी कम रिपीट होता है।चीफ मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने बताया के हेपेटाइटिस के मरीजों के लिए जरूरी है कि वह दवा लेने से पहले अपना आधार कार्ड,जाच रिपोर्ट जिसमें हेपेटाइटिस होने की तसदीक हो।________हेपेटाइटिस बी वायरस का जीवन चक्र तब बनता है जब वायरस मेज़बान यकृत कोशिका में प्रवेश करता है और यकृत कोशिका के केंद्रक में पहुँच जाता है। केंद्रक के अंदर पहुँचकर, वायरल डीएनए एक सहसंयोजक रूप से बंद वृत्ताकार डीएनए (सीसीसीडीएनए) में परिवर्तित हो जाता है जो वायरल प्रतिकृति (नए हेपेटाइटिस बी वायरस के निर्माण) के लिए एक टेम्पलेट का काम करता है।___________हेपेटाइटिस सी वायरस (एचसीवी) का जीवन चक्र मानव यकृत कोशिकाओं (हेपेटोसाइट्स) पर शुरू होता है, जहां वायरस विशिष्ट रिसेप्टर्स से जुड़ता है, फिर कोशिका के अंदर प्रवेश करता है और अपना आनुवंशिक आरएनए जारी करता है। यह आरएनए वायरल प्रोटीन के निर्माण और वायरस की प्रतिकृति दोनों के लिए आवश्यक होता है। यह जीवन चक्र लंबे समय तक चलने वाले यकृत संक्रमण (क्रोनिक हेपेटाइटिस सी) की ओर ले जाता है, जो धीरे-धीरे यकृत को नुकसान पहुंचाता है और सिरोसिस तथा यकृत विफलता का कारण बन सकता है,_____ अगर कोई मरीज बाहर से आकर दवा अपना इलाज कराना चाहता है तो उसके लिए जरूरी होगा कि अस्पताल में अपनी जांच कराए अगर वह पॉजिटिव पाया जाता है तब उसका इलाज किया जाएगा। महीने में एक बार मरीज को एक माह की दवा दी जाएगी और उसे अपनी जांच भी करनी होगी।सीएमएस ने बताया कि हेपेटाइटिस कई अलग-अलग तरीकों से फैल सकता है लेकिन मुख्य रूप से यह संक्रमित व्यक्ति के रक्त,वीर्य या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलता है।हेपेटाइटिस ए, बी, और सी के लिए संचरण के विशिष्ट तरीके अलग-अलग होते हैं। हेपेटाइटिस बी संक्रमित व्यक्ति के रक्त, वीर्य या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलता है।यह असुरक्षित यौन संबंध, सुई साझा करने, या मां से बच्चे में जन्म के दौरान फैल सकता है। जबकि हेपेटाइटिस सी मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के रक्त के संपर्क में आने से फैलता है। यह आमतौर पर सुई साझा करने या नशीली दवाओं के इंजेक्शन के माध्यम से फैलता है। झोलाछाप डॉक्टरों के द्वारा जो इंजेक्शन लगाए जाते हैं और उनकी सूई एक मरीज के अलावा दूसरे के लगा दी जाती है उसे हेपेटाइटिस हो जाता है जो लोग टैटू बनवेट हैं उन्हें चाहिए कि वह अच्छी जगह पर और साफ जगह पर साफ सुई से बनवाएं।



