दिनांक: 03-06-2025लखनऊ, उत्तर प्रदेश।मुख्य अतिथि: डॉ.विनीत कुमार हेड ऑफ डिपार्टमेंट डॉक्टर राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस।आज हम विश्व क्लबफुट दिवस मना रहे हैं, अनुष्का फाउंडेशन अपने सभी दानदाताओं और समर्थकों का आभारी है जो यह सुनिश्चित करने के हमारे उद्देश्य में हमारा समर्थन करते हैं कि क्लबफुट के साथ पैदा होने के परिणामस्वरूप कोई भी बच्चा बड़ा होकर विकलांग न हो।अनुष्का फाउंडेशन, एक गैर-लाभकारी संगठन जो भारत में क्लबफुट को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। जिला अस्पताल में प्रत्येक बुधवार को कमरा नंबर 22 वी में क्लब्फूट क्लिनिक में बच्चो का निशुल्क इलाज किया जाता है। अनुष्का फाउंडेशन के साथ साझेदारी में, यहां आर्थोपेडिक डॉक्टरों द्वारा इलाज किया जाता है।क्लबफुट एक जन्मजात विकृति है जो भारत में 800 नवजात शिशुओं में से 1 को प्रभावित करता है। इलाज न किए जाने या अधूरा इलाज दिए जाने से बच्चे गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं और उन्हें आजीवन विकलांगता का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, उचित उपचार से क्लबफुट का पूरी तरह से इलाज संभव है और आजीवन विकलांगता से आसानी से बचा जा सकता है।हालाँकि, क्लबफुट का इलाज किया जा सकता है, और इस तरह बाद में होने वाली विकलांगता को रोका जा सकता है, और प्रभावित लोगों के जीवन को बदलने में मदद मिल सकती है। क्लबफुट को खत्म करने के लिए अनुष्का फाउंडेशन ने अपने क्लबफुट कार्यक्रम को लागू करने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सरकार के साथ साझेदारी की , क्लबफुट और उनके उपचार कार्यक्रम के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) योजना, आशा कार्यकर्ताओं, स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है।अनुष्का फाउंडेशन केकार्यक्रम मॉडल में प्रमुख हस्तक्षेप बिंदुओं में से एक क्लबफुट उपचार की पोंसेटी पद्धति में आर्थोपेडिक डॉक्टरों और कास्टिंग तकनीशियनों के लिए आयोजित चिकित्सा प्रशिक्षण है। इसमें प्रथम चरण में कास्टिंग दूसरे चरण में टेनोटॉमी और तीसरे चरण में बच्चो को पांच साल तक जूते और बार दिए जाते है। अनुष्का फाउंडेशन देश के हर जिले में क्लबफुट कार्यक्रम लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि हर बच्चे को इलाज तक पहुंच मिल सके। अनुष्का फाउंडेशन जैसे सरकारी हितधारकों और भागीदारों के साथ हाथ मिलाकर, उनका लक्ष्य अपने कार्यक्रम को कुशलतापूर्वक लागू करना और यह सुनिश्चित करना है कि क्लबफुट के साथ पैदा होने के कारण कोई भी बच्चा विकलांग न रहे।आज क्लिनिक में डॉक्टर प्रभात ने 15 क्लब्फुट के मरीज का इलाज किया और उनके साथ डॉक्टर देवाशीष ने बच्चों के संपूर्ण इलाज के लिए प्रोत्साहित किया। अनुष्का फाउंडेशन के ब्रांच मैनेजर विशाल सक्सेना और प्रीति पुष्कर मौजूद रही।

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फतेहपुर: रेडक्रॉस सोसाइटी ने एनसीसी कैडेट्स को सिखाए जीवन रक्षा और सामाजिक जागरूकता के गुर MD NEWS बहुआयामी समाचार। रिपोर्ट शाहनूर आलम जिला सहायक ब्यूरो प्रमुख फतेहपुर फतेहपुर। अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस के अवसर पर आज राजकीय महिला महाविद्यालय की एनसीसी कैडेट्स के लिए एक वृहद जागरूकता एवं प्रशिक्षण अभियान का आयोजन किया गया। इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी के तत्वावधान और डॉ. सत्यनारायण सेवा फाउंडेशन के संयोजकत्व में यह कार्यक्रम रेडक्रॉस भवन में संपन्न हुआ। अभियान का नेतृत्व रेडक्रॉस के चेयरमैन व उत्तर प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने किया।कार्यक्रम के दौरान कैडेट्स को मुख्य रूप से चार महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूक किया गया:टीबी जागरूकता: मुख्य वक्ता डॉ. अशोक कुमार गुप्ता ने कैडेट्स को टीबी बीमारी के लक्षण, बचाव और उपचार की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने सभी को ‘निक्षय मित्र’ बनकर समाज से टीबी उन्मूलन में सहयोग करने का आह्वान किया।जल संरक्षण: डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने पानी की हर बूंद को कीमती बताते हुए स्कूलों/घरों में ‘वाटर बेल’ लगाने और आरओ (RO) से निकलने वाले वेस्ट पानी को एकत्र कर उपयोग में लाने की अपील की। इस दौरान जल संरक्षण जागरूकता निवेदन पत्रक भी बांटे गए।नशामुक्ति संकल्प: कैडेट्स को जागरूक करते हुए वक्ताओं ने कहा, “हमारा शरीर डस्टबिन नहीं है।” तंबाकू से कैंसर और अत्यधिक अल्कोहल से लिवर की गंभीर बीमारियां होती हैं। इसके बाद सभी कैडेट्स ने खुद नशे से दूर रहने और दूसरों को प्रेरित करने की शपथ ली।सीपीआर (CPR) प्रशिक्षण: डॉ. अनुराग ने आपातकालीन स्थिति में जान बचाने के लिए ‘कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन’ (CPR) का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति का दिल काम करना बंद कर दे, तो 1 वर्ष से ऊपर के व्यक्ति को 1 मिनट में 120 बार दबाव व 8 बार मुंह से सांस (30 बार दबाव और 2 बार सांस का चक्र) देकर और 1 वर्ष से छोटे बच्चे को 1 मिनट में 60 बार दबाव व 8 बार सांस देकर जीवन बचाया जा सकता है।इस सफल आयोजन में रेडक्रॉस के कार्यकारिणी सदस्य चैतन्य कुमार और प्रबंध समिति सदस्य उमेश कुमार श्रीवास्तव ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।