हरेन्द्र प्रताप सिंह एम डी न्यूज़ बिजुआ सिंघिया फार्म में 21 घर और 55 एकड़ जमीन नदी में समाई,लखीमपुर खीरी के बिजुआ विकास खंड में शारदा नदी का रौद्र रूप लगातार जारी है। 18वें दिन भी नदी का कटान जारी रहने से लोग अपने घर तोड़ने पर मजबूर हैं। अब तक 21 घर और लगभग 55 एकड़ फसल युक्त कृषि भूमि शारदा नदी में समाहित हो चुकी है।तराई क्षेत्र में शारदा नदी का विकराल रूप इस समय सबसे बड़ा संकट बन गया है। बाढ़ का पानी भले ही कम हो गया हो, लेकिन नदी का कटान किसानों और ग्रामीणों के जीवन पर गहरा प्रभाव डाल रहा है। इस वर्ष शारदा नदी में आई बाढ़ के कारण तलहटी में बसे गांव सिंधिया फार्म का अस्तित्व मिटने की कगार पर है। बिजुआ ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत जौहरा गुजारा के मजरा गांव सिंधिया फार्म में इन दिनों कटान तेजी से हो रहा है।बीते 18 दिनों में किसानों की लगभग 55 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि शारदा में समाहित हो चुकी है। खेतों में लगी गन्ने और धान की फसल नदी की धारा में बह गई है, जिससे किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही शारदा नदी की धारा गांव की ओर बढ़ती चली गई, जिससे बीते पंद्रह दिनों में सत्यपाल, राजकुमार, दुर्गा प्रसाद, हरिकिशुन, राजाराम और आरती सहित कई लोगों के पक्के मकान नदी में समाहित हो चुके हैं। कई अन्य ग्रामीणों के मकान भी कटने की कगार पर हैं।पीड़ित ग्रामीण ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा अभी तक बाढ़ राहत किट तक वितरित नहीं की गई है और न ही बाढ़ से हो रहे कटान को रोकने का कोई प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में अब कुछ ही घर शेष बचे हैं, और यदि जल स्तर एक फीट भी बढ़ा तो कुछ ही घंटों में गांव का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। क्षेत्रीय लेखपाल राकेश कुमार शुक्ला लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। वे मौके पर पहुंचकर पूरी रिपोर्ट तहसील प्रशासन को निरंतर भेज रहे हैं। नदी अभी भी काफी तेजी से कटान कर रही है।

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