रामनगर, बाराबंकी (उत्तर प्रदेश) ग्रामीण क्षेत्र से रिपोर्ट

ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा पशुओं की समस्या दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। जब तक पशु ग्रामीणों को दूध देते हैं, तब तक उनका पालन-पोषण किया जाता है, लेकिन दूध देना बंद होते ही उन्हें सड़क पर छोड़ दिया जाता है।

इन आवारा पशुओं से न केवल किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं, बल्कि आए दिन सड़क दुर्घटनाओं का भी कारण बनते हैं। अक्सर लोग इन्हें बचाने के चक्कर में चोटिल हो जाते हैं और कई बार अपनी जान तक गंवा बैठते हैं।

शासन की ओर से प्रशासन को स्पष्ट निर्देश हैं कि ऐसे पशुओं को गौशालाओं में भेजा जाए। लेकिन गांवों में कुछ लोग अपनी जरूरत पूरी होने तक ही पशुओं को पालते हैं और बाद में उन्हें आवारा छोड़ देते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी की जान आवारा पशुओं के कारण न जाए और किसानों की फसलों की रक्षा हो सके।

रिपोर्टर – रामानंद सागर

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