बेजुबानों की मौत पर ‘मौन’ जिम्मेदार: सड़क किनारे तड़पती गाय तीन दिन में दूसरा हादसा

रिपोर्ट हरेन्द्र प्रताप सिंह

एमडी न्यूज़ बिजुआ

बिजुआ खीरी। विकास खण्ड बिजुआ के बसतौली में लखीमपुर भीरा मार्ग आवारा पशुओं के लिए मौत का जाल बन गया है। पशु प्रबंधन में प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा बेजुबान जानवरों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है। तीन दिन पहले एक गाय की दर्दनाक मौत के बाद आज रात बुधवार की रात फिर एक गाय तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आकर अधमरी अवस्था में सड़क किनारे पड़ी मिली है।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि रात के अंधेरे में किसी अज्ञात और तेज रफ्तार वाहन ने सड़क पर बैठी एक गाय को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि गाय लहूलुहान होकर सड़क के किनारे तड़पने लगी। सुबह जब लोगों ने गाय को अधमरी हालत में देखा, तो आक्रोश फैल गया।
इस घटना से ठीक तीन दिन पहले, इसी हाइवे पर एक अन्य गाय की दुर्घटना में मौत हो गई थी, जिसका शव कई घंटों तक सड़क के किनारे पड़ा रहा था। एक ही सप्ताह के भीतर दो बड़ी घटनाएं, प्रशासन के दावों और कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।


क्षेत्र के लोगों का कहना है कि आवारा पशुओं की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। “ये हाइवे इनके लिए यमदूत बन गया है,” एक स्थानीय दुकानदार ने कहा। “हमने कई बार प्रधान और अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन पशुओं को हटाने या गौशाला भेजने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इन मूक जानवरों की तड़प देखी नहीं जाती।”
ये आवारा पशु अक्सर रात के समय हाइवे पर झुंड बनाकर बैठ जाते हैं, जिससे अंधेरे में आ रहे वाहन चालकों को अचानक इन्हें देख कर ब्रेक लगाने का मौका नहीं मिलता और दुर्घटना हो जाती है। इन हादसों में न सिर्फ पशुओं की मौत होती है, बल्कि वाहन चालकों को भी गंभीर चोटें आती हैं।
बसतौली के निवासियों ने लखीमपुर खीरी जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग से तत्काल कार्यवाही की मांग की है।
यदि प्रशासन जल्द ही इस ओर ध्यान नहीं देता है, तो यह ‘मौत का सिलसिला’ जारी रहेगा, जो न केवल पशुओं के लिए बल्कि हाइवे पर यात्रा करने वाले हर व्यक्ति के लिए एक बड़ा खतरा है।

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