फसल अवशेष प्रबंधन के उपाय अपनाएं, खेत और पर्यावरण को नुकसान होने से बचाएं……. डीएम।
अमेठी: शासन के निर्देश के क्रम में प्रमोशनल आफ एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन फार इन-सीटू मैनेजमेंट ऑफ़ क्रॉप रेजीड्यू योजनांतर्गत जनपद के किसानों को फसल अवशेष जलाने से होने वाले दुष्प्रभाव तथा फार्मर रजिस्ट्री कराने के संबंध में किसान भाइयों को जागरूक करने के उद्देश्य से आज जनपद की सभी तहसीलों के लिए कलेक्ट्रेट परिसर से जिलाधिकारी संजय चौहान ने 04 प्रचार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। प्रचार-प्रसार वाहन द्वारा गांव-गांव जाकर कृषकों को पराली न जलाये जाने के सम्बन्ध में जागरूक किये जाने के साथ ही पराली को खेत में ही कम्पोस्ट खाद के रूप में प्रयोग किये जाने हेतु प्रोत्साहित कर फसल अवशेष प्रबन्धन एवं फसल अवशेष नहीं जलाने के सम्बन्ध में किसानो को जागरूक करने एवं फसल अवशेष जलाये जाने से हो रहे प्रदूषण की रोकथाम हेतु पराली प्रबन्धन की जानकारी देगा। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने किसान भाइयों से अपील करते हुए कहा कि फसल अवशेष को ना जलाएं, फसल अवशेष प्रबंधन के उपाय अपनाकर खेत और पर्यावरण को नुकसान होने से बचाएं। उन्होंने बताया की फसल अवशेष को जलाने से पर्यावरण प्रदूषण होता है खेत में मौजूद लाभदायक जीवाणु मर जाते हैं जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति काम हो जाती है और अच्छी फैसले पैदा नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि कम्बाईन हार्वेस्टर के साथ एस०एम०एस० का प्रयोग किया जाये जिससे पराली प्रबन्धन कटाई के समय ही हो जाये। सुपर एस०एम०एस० के विकल्प के रूप में अन्य फसल अवशेष प्रबन्धन के यंन्त्र जैसे स्ट्रारीपर, स्ट्रारेक व बेलर, मल्चर, स्ट्राचापर, श्रबमास्टर, रोटरी स्लेशर, रिवर्सिबुल एम०बी० प्लाउ का भी प्रयोग कम्बाइन हार्वेस्टर के साथ किया जाये, जिससे खेत में फसल अवशेष बण्डल बनाकर अन्य उपयोग में लाया जा सके अथवा काटकर मिट्टी में मिलाया जा सके। कम्बाईन हार्वेस्टर के संचालक की जिम्मेदारी होगी कि कटाई के दौरान उपरोक्त समस्त व्यवस्था स्वयं सुनिश्चित कराते हुए कटाई का कार्य करेगें। यदि कम्बाइन स्वामी द्वारा बिना फसल अवशेष प्रबन्धन के यंन्त्रो यथा एस०एम०एस०, स्ट्रारीपर आदि का उपयोग किये बिना कम्बाईन का प्रयोग किया जाता है तो उस पर नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने जनपद के समस्त कृषक बंधुओ से अनुरोध करते हुए कहा कि फसल अवशेष को न जलाये तथा अपनी मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाये। पराली प्रबन्धन किये जाने हेतु अधिक से अधिक पराली को मिट्टी में मिलाकर, कम्पोस्ट खाद बनाकर, गौशालाओ / गौसेवकों को उपलब्ध करायें। राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम धारा-24 के अन्तर्गत छतिपूर्ति की वसूली एवं धारा 26 के अन्तर्गत उल्लघंन की पुनरावृत्ति होने पर सम्बन्धित के विरुद्ध अर्थदण्ड इत्यादि की कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने बताया कि 02 एकड़ से कम क्षेत्र के लिए रू0 2500/, 02 से 05 एकड क्षेत्र के लिए रू0 5000/, 05 एकड से अधिक के लिए रू0 15000/- अर्थदण्ड निर्धारित किया गया है। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अर्पित गुप्ता, उप कृषि निदेशक सत्येन्द्र कुमार सहित अन्य संबंधित उपस्थित रहे।
एमडी न्यूज दुर्गेश कुमार सिंह प्रिंट मीडिया

