
लंदन में भारतीय संस्कृति की गूंज: मेयर ने किया शिप्रा पाठक की ‘महाकुंभ’ पुस्तक के अंग्रेज़ी संस्करण का भव्य विमोचन।
रिपोर्टर प्रदीप पाण्डेय बदायूं
बदायूं ,नई दिल्ली, भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और पर्यावरण संरक्षण को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने वाला ऐतिहासिक क्षण लंदन में दर्ज हुआ। लंदन की मेयर ने पर्यावरणविद, जल संरक्षक एवं पंचतत्व फाउंडेशन की संस्थापक वाटर वूमेन शिप्रा पाठक द्वारा लिखित प्रसिद्ध पुस्तक “महाकुंभ” के अंग्रेज़ी संस्करण का भव्य विमोचन किया। इस अवसर ने न केवल भारतीय सांस्कृतिक विरासत को विदेशी भूमि पर सम्मान दिलाया, बल्कि भारत की नदी संस्कृति और सनातन चिंतन की वैश्विक स्वीकृति को भी सशक्त रूप से स्थापित किया।

विमोचन समारोह लंदन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान हुआ। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मेयर द्वारा “महाकुंभ” पुस्तक के अंग्रेज़ी संस्करण का अनावरण था। यह पुस्तक महाकुंभ की भव्यता, इसकी सांस्कृतिक यात्रा और भारतीय नदी दर्शन की प्राचीन परंपरा को विश्व समुदाय के समक्ष अत्यंत प्रभावी रूप में प्रस्तुत करती है।मेयर ने पुस्तक पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा“महाकुंभ पुस्तक भारतीय सनातन परंपरा की गहराइयों को समझने का सशक्त माध्यम है। शिप्रा पाठक ने नदी पूजन, पर्यावरण चिंतन और सामाजिक एकात्म भाव को जिस स्पष्टता से प्रस्तुत किया है,

वह सराहनीय और प्रेरणादायक है।शिप्रा पाठक को मेयर कार्यालय द्वारा ‘प्रकृति संवाद’ विषय पर विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। यह निमंत्रण उनके पर्यावरणीय प्रयासों की वैश्विक पहचान का संकेत है। कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों और पर्यावरण प्रेमियों ने उनके काम की भूरि-भूरि प्रशंसा की।शिप्रा पाठक वर्षों से जल संरक्षण, प्लास्टिक-मुक्त अभियान, नदी स्वच्छता और पर्यावरण जागरूकता के लिए कार्यरत हैं। पंचतत्व फाउंडेशन के माध्यम से वह भारत में कई प्रमुख धार्मिक आयोजनों में पर्यावरण सुरक्षा को बढ़ावा देती रही हैं। महाकुंभ के दौरान भी उनकी संस्था ने लाखों थैले और थालियाँ वितरित कर प्लास्टिक विकल्पों को बढ़ावा दिया, जिससे स्वच्छता अभियान को अत्यंत गति मिली।विमोचन कार्यक्रम के दौरान महाकुंभ पुस्तक की 250 से अधिक प्रतियां उपस्थित ब्रिटिश नागरिकों और भारतीय मूल के परिवारों को सौंपा गया। लोगों ने भारतीय संस्कृति, सनातन दर्शन और नदी सभ्यता के प्रति गहरी रुचि दिखाई। कई लोगों ने यह भी कहा कि भारतीय धर्म और अध्यात्म विश्व को पर्यावरणीय संतुलन व मानवीय एकता की नई दिशा देता है।समारोह में संबोधित करते हुए शिप्रा पाठक ने कहा “महाकुंभ सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की सामूहिक चेतना का दिव्य संगम है। यहां जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र किसी का भेद नहीं—सभी श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती की शक्ति में एकाकार होते हैं।

यह भारत की आध्यात्मिक एकता का सबसे बड़ा प्रतीक है।”उन्होंने बताया कि पुस्तक में महाकुंभ की आस्था, दर्शन, वैज्ञानिक दृष्टि, नदी संस्कृति, मानव मन की आध्यात्मिक यात्रा और भारत की सनातन परंपरा को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक का उद्देश्य विश्व को भारत की नदी सभ्यता और पर्यावरण-मित्र जीवन पद्धति से परिचित कराना है।कार्यक्रम के अंत में शिप्रा पाठक ने वहां उपस्थित विदेशी गणमान्य व्यक्तियों और अतिथियों को भारत आने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहाआप सभी भारत आइए। मैं आपको नर्मदा, गोमती, गंगा, यमुना और भारत की प्रमुख नदियों के दर्शन कराऊंगी। भारत की नदी संस्कृति को नजदीक से महसूस करना एक अविस्मरणीय अनुभव होगा।”उनके इस आमंत्रण ने दर्शकों को अत्यंत प्रभावित किया। उपस्थित कई विदेशी अतिथियों ने भारत के प्राकृतिक और आध्यात्मिक सौंदर्य को अनुभव करने की इच्छा व्यक्त की।लंदन में हुआ यह विमोचन केवल एक पुस्तक का अनावरण नहीं था, बल्कि इसने भारत की सनातन संस्कृति, पर्यावरणीय चिंतन और नदी सभ्यता को विश्व के सामने नए रूप में स्थापित कर दिया। शिप्रा पाठक की पुस्तक ने यह संदेश दिया कि भारत की जड़ें गहराई से प्रकृति और मानवता से जुड़ी हैं।यह कार्यक्रम भारतीय संस्कृति के वैश्विक विस्तार का ऐतिहासिक पड़ाव बनकर सामने आया है। महाकुंभ का अंग्रेज़ी संस्करण अंतरराष्ट्रीय पाठकों को भारत के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।लंदन में शिप्रा पाठक की “महाकुंभ” पुस्तक का विमोचन भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान का गौरवपूर्ण क्षण है। यह आयोजन दुनिया को यह संदेश देता है कि भारत की नदी परंपरा, पर्यावरण दर्शन और सनातन संस्कृति न केवल अद्वितीय हैं, बल्कि विश्व के लिए मार्गदर्शक भूमिका निभाने की क्षमता भी रखती है।
