तिब्बती संस्थान को आई टी ई पी की मान्यता मिलना गौरव की बात। डॉक्टर सी के सलूजा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सदस्य और दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डॉ सी के सलूजा ने आज केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के नालंदा भवन कमेटी रूम में शिक्षा विभाग के शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि एनसीटी द्वारा ITEP(चार वर्षीय एजुकेशन स्नातक) की मान्यता मिलना इस संस्थान के लिए गौरव का विषय है।यह पाठ्यक्रम तिब्बती एवं हिमालयन छात्रों में उनके सांस्कृतिक समझ एवं परंपरा के प्रति संवेदनशील होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि आईटेप का मूल उद्देश्य करुणा एवं मानवता के प्रति संवेदनशील होना है जो बौद्ध धर्म का मूल है। छात्रों में एक दूसरे के प्रति करुणा एवं राष्ट्रीयता का विकास करना ही नई शिक्षा नीति के मूल में है। ITEP का मुख्य उद्देश्य 21वीं सदी की जरूरतों के लिए सुप्रशिक्षित, पेशेवर और नैतिक शिक्षकों का एक समूह तैयार करना है, जो स्कूली शिक्षा के विभिन्न चरणों में शिक्षण के लिए सक्षम हों।इस कार्यक्रम के द्वारा स्नातक और शिक्षक शिक्षा को मिलाकर एक एकीकृत 4 साल का कोर्स प्रदान करना है। अध्यक्षता करते हुए संस्थान के कुलपति डब्लू डी नेगी ने कहा कि हमारा उद्देश्य ऐसे शिक्षकों का निर्माण करना है जो 21वीं सदी के वैश्विक मानकों को पूरा करते हैं और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें ।स्वागत करते हुए संस्थान की कुल सचिव डॉक्टर सुनीता चंद्रा ने कहा कि इस संस्थान का उद्देश्य छात्रों में अपनी संस्कृति के प्रति प्रेम, राष्ट्रीय गौरव और नागरिकता की भावना पैदा करना है, साथ ही उन्हें नैतिक, तर्कसंगत और दयालु बनाना है। धन्यवाद करते हुए शिक्षा विभाग के निदेशक प्रो.उमेश चंद्र सिंह ने कहा कि मनुष्यता को बचाये रखना वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौती है जो शिक्षा के द्वारा ही संभव है।इस अवसर डॉ भावना बहल, डॉ सुशील कुमार सिंह, डॉ जम्पा थुपतेन, डॉ नामगांग सहित शिक्षा विभाग के अन्य शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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