*भारतीय फ़न ए सिपहगिरी एसोसिएशन के
शहर बनारस के शोहरत याफता
मशहूर ए मारूफ सख्शीयत
भारतीय फन ए सिपहगिरी
एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के पुर्व अध्यक्ष
जनाब शमीम अहमद पहलवान
के इंतकाल से बनारस के उस्ताद का जाना समाज के लिए एक बड़ा नूकसान हुआ है
उत्तर प्रदेश के भारतीय फ़न ए सिपहगिरी एसोसिएशन के पदाधिकारियों को इसकी सुचना मिलते ही तमाम खलिफाओं और शागिर्दों में शोक की लहर दौड़ पड़ी
उस्ताद के इंतकाल की खबर सुनते ही पुरा माहौल जैसे शांत हो गया
समीम उस्ताद एक ऐसी शख्सियत थे जो शहर के बेशुमार जुबानों पर ज़िक्र हुआ कर ता था
दिनांक, 27, 12 2025 को रात 8 बजे खामोश हो गए
मरहूम मोहताज ए तार्रुफ नहीं उनकी जिंदगी का हर लम्हा ए फिक्र बिल्कुल खुली किताब की मानिंद है उन्होंने अपनी जिंदगी कीमती वक़्त समाज को सर्फ किया वो किसी से पोशीदा नहीं थे
उस्ताद की समाजिक ख़िदमात को भुला नहीं जा सकता
अपने कोशिशों से शहर की भीड़ को चीरते हुए हालात का सामना करने का आज़म रखते थे शहर के सभी धर्म के तेहवारों और दीगर मौकों पर अमन शांति के लिए हर लम्हा ए फिक्र रहा करते कई दहाई तक जिनके ख़िदमात समाज को सर सब्ज़ शादाब था आज हमारे बीच नहीं रहे
काफी खला मालूम होता है
दूसरे दिन 28, 12, 2025, को रात 8 बजे उनको आबाई कब्रिस्तान में नम आँखों से सुपुर्द ए खाक किया गया दुआ है अल्लाह मरहूम की मगफिरत अता फ़रमाए पूर्व अध्यक्ष जनाब शमीम उस्ताद कोयला बाजार के इंतकाल की खबर सुनकर हमें बेहद रंज-ओ-ग़म हुआ। यह सानिहा न सिर्फ मरहूम के अहले-ख़ाना के लिए, बल्कि पूरी भारतीय फन ए सिपहगिरी एसोसिएशन उत्तर प्रदेश और समाज के लिए एक नाक़ाबिले-तलाफ़ी नुक़सान है। मरहूम ने अपने दौर-ए-सदारत में इख़लास, दीयानत और ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ के जज़्बे के साथ संस्था की क़ियादत की और सबके दिलों में इज़्ज़त-ओ-एहतराम का मक़ाम हासिल किया। अजगैब शहीद मस्जिद राजघाट व बहुत सारी तंजिमों की जिम्मेदारी अपने कंधों पर संभाली और हर वक्त समाजी खिदमत में लगे रहे।
मरहूम की ख़िदमात, बसीरत और रहनुमाई हमेशा याद रखी जाएँगी। उनकी कोशिशों से संस्था को नई राह मिली और लकड़ी,पटा अखाड़ों की तरक़्क़ी के कई मरहले तय हुए। उनका बिछड़ जाना एक ऐसा ख़ला छोड़ गया है जिसे भरना आसान नहीं।
अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए उन्हें अपनी बेपनाह रहमत में जगह अता करे और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम नसीब करे। इस ग़म की घड़ी में अल्लाह तआला तमाम अहले-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और साथियों को सब्र-ओ-हिम्मत अता फरमाए।

