भारतीय बहुजन समाज सुधारक और राष्ट्रीय अध्यक्ष (आजमगढ़) एडवोकेट शिव शंकर सिंह यादव ने कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने ललई यादव, डॉ. भीमराव अंबेडकर और सावित्रीबाई फुले के विचारों पर चलने का आह्वान किया। यादव ने बच्चों को शिक्षा के महत्व के बारे में भी बताया।


बदायूं से आए चरन सिंह यादव ने कहा कि यदि डॉ. भीमराव अंबेडकर संविधान न लिखते, तो आज दबे-कुचले लोगों को शिक्षा का अधिकार न मिलता। उन्होंने संविधान के महत्व पर प्रकाश डाला और बच्चों को किताबें व कलम पुरस्कार स्वरूप भेंट किए। लखीमपुर के गांव कुअंटा से रामसागर यादव ने अपने संबोधन में कहा कि मृत्यु के बाद दशमा या तेरमी जैसे अनुष्ठान नहीं करने चाहिए। उन्होंने भगवान बुद्ध के मार्गदर्शन पर चलने की प्रेरणा दी।
भारतीय जनता पार्टी के मंडल प्रभारी सोबरन सिंह यादव ने भी मृत्यु भोज का विरोध किया। उन्होंने उपस्थित लोगों से बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का पालन करने का आग्रह किया।
इस समारोह में रामसागर यादव, मास्टर सुरेंद्र प्रधान, श्यामलाल यादव, अवधेश वर्मा, पूर्व विधायक रिजवान अली, तौलेसिंह (लखीमपुर), सुरेश सिंह

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