ब्रेकिंग न्यूज लखनऊ एम डी न्यूज़ चैनल रिपोर्टर प्रमोद कुमार लखनऊ आज का साइबर सुरक्षा विचार*ऑपरेशन चक्र-V (CBI), ऑपरेशन मैट्रिक्स (एमपी पुलिस), ऑपरेशन थिरैनीकु (तमिलनाडु पुलिस, साइबर क्राइम विंग), और साई-हॉक (दिल्ली पुलिस) साइबर धोखाधड़ी की रीढ़ – म्यूल अकाउंट्स – पर प्रहार कर रहे हैं।* ये खाते घोटालों और संगठित धोखाधड़ी नेटवर्क को ताक़त देते हैं। बैंकों को ज़िम्मेदारी निभानी चाहिए: सक्रिय निगरानी, त्वरित ब्लॉकिंग और नागरिक सुरक्षा। “साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क म्यूल अकाउंट्स पर निर्भर हैं – श्रृंखला तोड़ें, नागरिकों की रक्षा करें।” संदर्भ और आवश्यकता- साइबर अपराध आज सीमाहीन है, जो सोशल मीडिया, डिजिटल भुगतान और निवेश ऐप्स का शोषण करता है। – धोखेबाज़ म्यूल अकाउंट्स – धोखाधड़ी किए गए पैसों को छिपाने वाले बैंक खातों – पर निर्भर रहते हैं। – जैसे भौतिक गश्त हमारी सड़कों को सुरक्षित करती है, वैसे ही साइबर गश्त और इंटेलिजेंस टीमें डिजिटल हाईवे को सुरक्षित करती हैं। हाल की पहल- ऑपरेशन मैट्रिक्स (एमपी पुलिस) और साई-हॉक (दिल्ली पुलिस) ने म्यूल अकाउंट्स को निशाना बनाया और धोखाधड़ी नेटवर्क को बाधित किया। – ये अभियान एक रणनीतिक बदलाव को दर्शाते हैं: शिकायत-आधारित कार्रवाई से सक्रिय रोकथाम की ओर। साइबर धोखाधड़ी का प्रभाव (2019–2025)- भारत हर दिन लगभग ₹24 करोड़ साइबर धोखाधड़ी में खोता है। – छह वर्षों में कुल नुकसान: ₹52,976 करोड़ (स्रोत: I4C, गृह मंत्रालय)। – प्रमुख धोखाधड़ी प्रकार: – फर्जी निवेश ऐप्स और पोंजी स्कीम – फ़िशिंग लिंक और प्रतिरूपण घोटाले – UPI/वॉलेट/कार्ड धोखाधड़ी – सीमा-पार सिंडिकेट संचालन रणनीतिक महत्व- नागरिक सुरक्षा: परिवारों, पेंशन और जीवनभर की बचत की रक्षा। – राष्ट्रीय सुरक्षा: भारत की डिजिटल व्यवस्था का अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट्स द्वारा शोषण रोकना। – विश्वास निर्माण: डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं में भरोसा बहाल करना। – मॉडल ढांचा: अन्य राज्यों और एजेंसियों के लिए अनुकरणीय उदाहरण। नागरिकों के लिए रोकथाम उपाय- निवेश से पहले सत्यापन करें: केवल SEBI/RBI पंजीकृत प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करें। – डिजिटल भुगतान सुरक्षित करें: OTP, PIN या UPI क्रेडेंशियल कभी साझा न करें। – तुरंत रिपोर्ट करें: 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर जाएं। – सतर्क रहें: धोखेबाज़ WhatsApp, Telegram और सोशल मीडिया समूहों के माध्यम से विश्वास का शोषण करते हैं। बैंकों और संस्थानों के लिए आह्वान- संदिग्ध खातों की सक्रिय निगरानी। – म्यूल अकाउंट्स का त्वरित ब्लॉकिंग। – पुलिस और CERT-In के साथ सूचना साझा करना। – एआई-आधारित धोखाधड़ी पहचान और बहुभाषी अलर्ट। आगे की राह- जिला/ज़ोन स्तर पर साइबर गश्त टीमों का विस्तार, ताकि म्यूल अकाउंट सिंडिकेट ध्वस्त किए जा सकें। – एआई-आधारित निगरानी और साइबर फॉरेंसिक में क्षमता निर्माण। – क्षेत्रीय भाषाओं में जन-जागरूकता अभियान। – त्वरित प्रवर्तन के लिए मज़बूत कानूनी ढांचा। निष्कर्ष*साइबर धोखाधड़ी केवल पैसे की चोरी नहीं है—यह विश्वास की चोरी है। म्यूल अकाउंट्स को समाप्त करके और साइबर गश्त को मज़बूत बनाकर भारत अपनी डिजिटल अर्थव्यवस्था को सुरक्षित कर सकता है। हर नागरिक, बैंक और एजेंसी की भूमिका है धोखाधड़ी की श्रृंखला तोड़ने में।*

