
डॉ० पूर्णमासी राय जी की चतुर्थ पुण्यतिथि पर आयोजित संगोष्ठी में विद्वानों ने व्यक्त किए विचार।
वाराणसी। प्रख्यात शिक्षाविद्, चिंतक एवं मार्गदर्शक डॉ० पूर्णमासी राय जी की चतुर्थ पुण्यतिथि के अवसर पर एक विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर शिक्षा, संस्कृति एवं राष्ट्रनिर्माण में डॉ० पूर्णमासी राय जी के अविस्मरणीय योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत उद्बोधन के साथ हुआ। संगोष्ठी में डॉ० हरेन्द्र कुमार राय, सदस्य–शिक्षा सेवा चयन आयोग, उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि डॉ० पूर्णमासी राय जी का जीवन शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाने के लिए समर्पित रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रो० अवधेश प्रधान, पूर्व आचार्य, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने डॉ० राय जी को एक प्रेरक शिक्षक एवं मूल्यों के संवाहक के रूप में स्मरण किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो० विनय कुमार पाण्डये, समन्वयक, वैदिक विज्ञान केन्द्र, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने उनके वैचारिक योगदान को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ते हुए रेखांकित किया।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ० उदय प्रताप सिंह, पूर्व अध्यक्ष, हिन्दुस्तानी एकेडमी, प्रयागराज ने कहा कि डॉ० पूर्णमासी राय जी का व्यक्तित्व अकादमिक अनुशासन और सामाजिक सरोकारों का दुर्लभ समन्वय था। वहीं विशिष्ट वक्ता प्रो० रामसुधार सिंह, पूर्व अध्यक्ष, यूपी कॉलेज ने उनके शैक्षिक नेतृत्व और मानवीय दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो० जंगबहादुर पाण्डेय, पूर्व अध्यक्ष, राँची विश्वविद्यालय, रांची ने कहा कि डॉ० पूर्णमासी राय जी का जीवन नई पीढ़ी के लिए सतत प्रेरणा का स्रोत है और उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं।
संगोष्ठी के अंत में डॉ० पूर्णमासी राय जी के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया गया।
