एक्सपीरियंसिंग म्यूज़िक थेरेपी” विषय पर अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का सफल आयोजन।

वाराणसी, जनवरी 2026:
मनोविज्ञान विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी द्वारा 13 जनवरी 2026 को मनोविज्ञान विभाग में “एक्सपीरियंसिंग म्यूज़िक थेरेपी” विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के म्यूज़िक थेरेपी सेल एवं शोध केंद्र द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों तथा मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सक्रिय सहभागिता रही। यह कार्यशाला निःशुल्क आयोजित की गई। कार्यशाला के वक्ता श्री एरिक मेरिंग (अमेरिका) थे, जो एक बोर्ड-प्रमाणित म्यूज़िक थेरेपिस्ट, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध प्रारंभिक बाल संगीत शिक्षाविद्, बहु-वाद्य कलाकार तथा “टू लिटल ब्लैकबर्ड्स” पद्धति के लेखक हैं। उनके पास शिक्षा में स्नातकोत्तर उपाधि है तथा उन्होंने बनारस में तबला का दीर्घकालिक अध्ययन भी किया है, जो भारतीय संगीत परंपरा से उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। कार्यशाला के दौरान श्री मेरिंग ने जीवन के अंतिम चरण, डिमेंशिया देखभाल केंद्रों, विद्यालयों, मनोरोग कारागारों तथा विकासात्मक अक्षमताओं से ग्रस्त विभिन्न आयु वर्ग के व्यक्तियों के साथ अपने संगीत चिकित्सा के अनुभव साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगीत इसलिए चिकित्सकीय है क्योंकि यह व्यक्ति को अपनी कुंठाओं, भावनाओं और आंतरिक पीड़ाओं की अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संगीत उन लोगों के लिए भी प्रभावी होता है जिनमें स्मृति, भाषा या सहभागिता की इच्छा का अभाव होता है, क्योंकि संगीत सीधे भावनात्मक और तंत्रिका स्तर पर कार्य करता है। साथ ही उन्होंने संगीत चिकित्सा में सूक्ष्म योजना निर्माण एवं प्रलेखन (डॉक्यूमेंटेशन) के महत्व पर विशेष बल दिया। व्यावहारिक प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्होंने विभिन्न आयु वर्गों के लिए अलग-अलग वाद्य यंत्रों एवं चिकित्सकीय उपकरणों, विशेष रूप से पपेट्स (कठपुतलियों) के उपयोग को प्रदर्शित किया। उन्होंने कहा कि एक संगीत चिकित्सक के लिए भावनात्मक रूप से साहसी, संवेदनशील और मानवीय होना आवश्यक है। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के संरक्षण तथा कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी के नेतृत्व में संपन्न हुआ। प्रो. शैफाली वर्मा ठकराल, विभागाध्यक्ष, मनोविज्ञान विभाग ने कार्यक्रम को अकादमिक मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यक्रम का सफल समन्वय डॉ. दुर्गेश कुमार उपाध्याय एवं डॉ. मुकेश कुमार पंथ द्वारा किया गया, जबकि आउटरीच सहयोग प्रो. संजय द्वारा प्रदान किया गया।
यह कार्यशाला प्रतिभागियों के लिए संगीत चिकित्सा की वास्तविक अवधारणा को समझने का एक प्रभावी एवं अनुभवात्मक मंच सिद्ध हुई तथा इसकी व्यापक सराहना की गई। कार्यशाला के दौरान प्रो. रश्मि सिंह, प्रो. संजीव कुमार सिंह, डॉ. प्रतिभा सिंह, डॉ. पूर्णिमा श्रीवास्तव, डॉ. दीपमाला सिंह बघेल, डॉ. कंचन शुक्ला, डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा आदि की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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