कामायनी वाराणसी का स्थापना दिवस समारोह सोल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न।

वाराणसी नगर की अग्रणी सांस्कृतिक, सामाजिक एवं साहित्यिक संस्था कामायनी वाराणसी का 19वां स्थापना दिवस समारोह मकर संक्रांति 14 जनवरी को माँ शारदा अपाला वनवासी कन्या छात्रावास, पिशाचमोचन, वाराणसी के मुक्ताकाशीय प्रांगण में हर्ष और उल्लास पूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। वर्ष 2007 की मकर संक्रांति को कामायनी वाराणसी की स्थापना देश के सुप्रसिद्ध नाटककार प्रो. श्याम मोहन अस्थाना द्वारा प्रिय गोपाल भट्टाचार्य, नील कमल चैटर्जी और श्री प्रसाद जी के सान्निध्य में किया गया था। तब से लेकर आज तक यह संस्था निरंतर अपने उद्देश्यों को लेकर गंभीरता के साथ कार्यरत है। प्रो. श्याम मोहन अस्थाना की ही नाट्यकृतियां ‘बुद्धम् शरणम् गच्छामि’ एवं ‘मेरा नाम मथुरा है’ की यादगार प्रस्तुतियों से कामायनी ने देश भर की नाट्य प्रतियोगिताओं एवं समारोहों में अपना परचम लहराया था। तत्पश्चात कामायनी वाराणसी की ओर से तीसरा आदमी, राजा की मोहर, यह भी सच है, बेचारा भगवान, अंधेर नगरी चौपट राजा, कर्बला, चुप चांद तारा रोना नहीं, गदर बनारस में, यमदीप, शापग्रस्त, नटी विनोदिनी, मैकबेथ, कोई सुनता है, ख़ामोश कमरे, गेशे जंपा, शतरंज के खिलाड़ी, स्कंदगुप्त, अश्वत्थामा हतो नरो वा कुंजरो वा, कुंभ महात्म्य, दृष्टिहीन दिशाहीन, प्रेमचंद प्रसाद प्रसंग, बड़े भाईसाहब इत्यादि नाटकों का वीणा सहाय, नील कमल चैटर्जी, निशांत सक्सेना, अमिताभ कृष्ण घाणेकर, अविनाश देशपांडे, आलोक सिन्हा, डॉ. सुमित श्रीवास्तव, पार्थो चक्रवर्ती, डॉ. गौतम चटर्जी, अष्टभुजा मिश्र, अमलेश श्रीवास्तव एवं अमन श्रीवास्तव आदि निर्देशकों ने कई-कई बार प्रभावशाली मंचन किया।
कामायनी वाराणसी द्वारा सामाजिक सरोकारों के प्रति अपने समर्पण से नगर में अनेक गतिविधियां संचालित हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed